भोपाल। लाइफ लाइन बड़ा तालाब अतिक्रमण की जकड़ में है। पिछले 10 साल में बड़ा तालाब के कैचमेंट एरिया में ही सैकड़ों पक्के निर्माण बन गए। कुछ तो मुनारों से ही सटकर बने हैं। दूसरी ओर, भदभदा की 350 से ज्यादा झुग्गियां ही हटाई जा सकी हैं। इसे लेकर जिला प्रशासन और नगर निगम को एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्राइबल) कई बार फटकार भी लगा चुका है।
हाल ही में सांसद आलोक शर्मा ने अफसरों की बैठक भी ली थी और बड़ा तालाब के अतिक्रमण को लेकर जमकर फटकार लगाई थी। इसके बाद जिला प्रशासन एक्टिव हुआ है। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने जिला स्तरीय टास्क फोर्स भी बनाई है, जो कार्रवाई पर नजर रखेगी। ऐसे में प्रशासन जल्द ही बड़े स्तर पर कार्रवाई कर सकता है। बुधवार को जिम्मेदार एसडीएम-तहसीलदारों के बीच कार्रवाई को लेकर चर्चा भी हुई।
अब तक 3 बार सर्वे, ठोस कार्रवाई नहीं
बता दें कि बड़ा तालाब का बीते दस साल में 3 बार सर्वे हो चुका है। इनमें बड़ी संख्या में अतिक्रमण सामने आए, लेकिन सर्वे रिपोर्ट का आज तक पता नहीं है। इस वजह से बैरागढ़, खानूगांव, सूरज नगर, गौरागांव, बिसनखेड़ी समेत कई जगहों पर अतिक्रमण हुए। कई मैरिज गार्डन, फार्म हाउस, स्कूल-कॉलेज, घरों की सीमाएं बड़ा तालाब में हैं।
50 मीटर के दायरे में ढेरों अतिक्रमण
एक्सपर्ट राशिद नूर की मानें तो शहरी सीमा में 50 मीटर और ग्रामीण सीमा में 250 मीटर के दायरे में कोई निर्माण नहीं होना चाहिए, लेकिन एफटीएल मुनार से सटकर ही पक्के निर्माण बन गए हैं। ऐसे 1 या 2 नहीं, बल्कि सैकड़ों निर्माण हैं।
भदभदा, बिसनखेड़ी, गौरागांव, बील गांव और सूरजनगर में बड़ी बिल्डिंग, फार्म हाउस, रिसॉर्ट भी देखने को मिल सकते हैं। हैरत की बात ये है कि बड़ा तालाब रामसर साइट भी है। बावजूद सालों से सिर्फ फाइलों में ही कब्जे हटे हैं।
सूरजनगर में तो जिस जगह पर रामसर साइट है और नगर निगम की मुनार लगी है। ठीक उससे जुड़ी बिल्डिंग की बाउंड्रीवॉल है। यही पर नगर निगम की सीवेज लाइन भी बिछाई गई है। मुनार के पास सड़क भी भरी गई है, जो नियम के विरुद्ध है। दूसरी ओर गौरागांव से बील गांव की तरफ सड़क भी तालाब के बीच से ही गुजरी है।