मंदसौर। विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) ने सी.बी.एन. के तत्कालीन उपनिरीक्षक मधुसूदन पाठक को रिश्वत लेने के मामले में दोषी ठहराते हुए 5 साल का कारावास और 25,000 रुपये का जुर्माना तथा धारा 8 के तहत 4 साल की अतिरिक्त सजा और 10,000 रुपये का अर्थदंड सुनाया।

अभियोजन के अनुसार, 30 जुलाई 2016 को नारकोटिक्स प्रकोष्ठ मंदसौर विंग इंदौर द्वारा राजस्थान निवासी सुखलाल कुमावत के खिलाफ अफीम मामले की जांच की जा रही थी। आरोपी उपनिरीक्षक पाठक ने फरियादी मुकेश बैरागी से संपर्क कर कहा कि उनके पिता कमलदास बैरागी का भी नाम केस में आया है। पिता को केस से बचाने के लिए आरोपी ने 5 लाख रुपये रिश्वत मांगी।

मुकेश ने 2.5 लाख रुपये में समझौता किया, लेकिन वास्तव में उसका मकसद आरोपी को रंगे हाथों पकड़वाना था। 8 अगस्त 2016 को उसने लोकायुक्त उज्जैन में लिखित शिकायत दी। लोकायुक्त पुलिस ने 11 अगस्त 2016 को ट्रेप लगाकर आरोपी को 30,000 रुपये लेते हुए पकड़ लिया।

इस मामले में अभियोजन की ओर से सहायक निदेशक अभियोजन गजराज सिंह चौहान और विशेष लोक अभियोजक रमेश गामड़ ने पैरवी की। 9 अगस्त 2019 को अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

मुख्य तथ्य-
आरोपी- मधुसूदन पाठक, तत्कालीन उपनिरीक्षक CBN, मंदसौर
सजा- 5 साल कारावास + 25,000 जुर्माना (धारा 13(1)डी), 4 साल कारावास + 10,000 जुर्माना (धारा 8)
रिश्वत की राशि- 30,000 रुपये रंगे हाथ पकड़ी गई
जांच- लोकायुक्त पुलिस उज्जैन द्वारा ट्रेप

यह मामला अधिकारियों में भ्रष्टाचार पर कड़ी चेतावनी और लोकायुक्त की कार्रवाई की मिसाल साबित हुआ।
