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February 27, 2026, 11:08 am
KHABAR : सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार, यहां होली पर बर्तन प्रथा बंद, उल्लंघन करने पर लगेगा 5000 का जुर्माना, इसलिए लिया गया फैसला, पढे़ खबर 

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इछावर। अखिल भारतीय चंद्रवंशी खाती समाज ने सामाजिक सुधार की दिशा में एक बड़ा और साहसिक कदम उठाया है। ग्राम पंचायत खेरी स्थित हनुमान मंदिर में समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। जिसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि होली के पर्व पर बरसों से चली आ रही ‘बर्तन प्रथा’ को अब पूरी तरह समाप्त किया जाएगा। इस फैसले का उल्लंघन करने वाले परिवार पर 5000 रुपये का आर्थिक दंड लगाने का प्रावधान भी किया गया है।


इसलिए लिया गया फैसला
बैठक में ग्राम खेरी के सरपंच प्रतिनिधि धनपाल सिंह वर्मा गांव के पटेल मेहरबान सिंह वर्मा के नेतृत्व में समाज के वरिष्ठजनों और प्रबुद्ध नागरिकों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि त्योहारों के नाम पर बढ़ती फिजूलखर्ची और उपहारों के लेन-देन की प्रतिस्पर्धा से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है। ‘बर्तन प्रथा’ जैसी कुरीतियां समाज में भेदभाव पैदा करती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए समाज ने अब इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।


ग्रामीणों ने फैसले का किया स्वागत
ग्राम पंचायत खेरी के इस निर्णय की आसपास के क्षेत्रों में भी सराहना हो रही है। ग्रामीणों का मानना है कि इस प्रकार के कड़े निर्णयों से न केवल समाज में समानता आएगी, बल्कि युवाओं को भी फिजूलखर्ची से दूर रहने की प्रेरणा मिलेगी। समाज के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जुर्माने की राशि का उपयोग समाज के सामूहिक कार्यों और विकास में किया जाएगा।


खेरी के सरपंच प्रतिनिधि धनपाल सिंह वर्मा ने कहा कि समाज के विकास के लिए पुरानी और बोझिल परंपराओं को त्यागना जरूरी है। होली खुशियों का त्योहार है, इसे सादगी और प्रेम से मनाया जाना चाहिए। यह फैसला समाज के हर वर्ग के हित में लिया गया है।


क्या है बर्तन प्रथा ?
सीहोर जिले के इछावर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में होली पर्व पर बर्तन प्रथा प्रचलित है। जिसे बर्तन बदलना या मिट्टी के नए बर्तनों का इस्तेमाल कहा जाता हैं। इस प्रथा में होली त्योहार पर घरों में पुराने मिट्टी के बर्तनों को बदलकर नए मिट्टी के बर्तन का उपयोग किया जाता है। इसे नई शुरुआत और शुद्धता का प्रतीक भी माना जाता हैं।

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