नीमच। जिले में अफीम तौल कार्य का शुभारंभ 1 अप्रैल से मालखेड़ा स्थित वाटर पार्क परिसर में हो गया है। प्रथम खंड की लूणी चिरनी पद्धति से उत्पादित अफीम का तौल 1 अप्रैल से 17 अप्रैल तक किया जाएगा। इस दौरान करीब 300 गांवों के लगभग 6000 अफीम काश्तकारों की उपज का तौल किया जाना प्रस्तावित है।

पहले दिन 20 गांवों के 225 किसान अपनी अफीम लेकर तौल केंद्र पहुंचे। विभागीय कार्यक्रम के अनुसार प्रतिदिन 15 से 20 गांवों के 400 से 450 किसानों की अफीम का तौल किया जाएगा।

किसानों की सुविधा के पुख्ता इंतजाम
तौल केंद्र पर किसानों के लिए पांडाल, कूलर, पंखे और ठंडे पेयजल की व्यवस्था की गई है। वहीं सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है तथा पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।

मॉर्फिन प्रतिशत बेहतर होने की उम्मीद
प्रारंभिक तौल में अफीम की गुणवत्ता अच्छी रहने और मॉर्फिन प्रतिशत बेहतर आने की संभावना जताई जा रही है, जिससे किसानों में संतोष का माहौल है।

झरड़ों को लेकर किसानों की चिंता
कुछ किसानों ने इस बार 8 से 10 झरड़े (ग्रेड) लगाए जाने पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि अधिक झरड़ों के कारण उपज में कटौती बढ़ सकती है, जिससे नुकसान होने की आशंका है। किसानों ने 2 से 3 झरड़े ही रखने की मांग की है।

विभाग ने दी सफाई
जिला अफीम अधिकारी एल.आर. दिनकर ने बताया कि झरड़ों के माध्यम से अफीम की गाढ़ता और गुणवत्ता का आकलन किया जा रहा है, जिससे किसानों को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।

तौल की निर्धारित प्रक्रिया
तौल प्रक्रिया के तहत पहले कंटेनर का वजन कर उसे काश्तकार को दिया जाता है। इसके बाद काश्तकार अफीम भरता है, जिसकी जांच कर 25 ग्राम का सैंपल लिया जाता है। सैंपल और कंटेनर को काश्तकार के नाम की स्लिप के साथ सील किया जाता है और अंत में तौल कर पर्ची किसानों को प्रदान की जाती है। अफीम तौल कार्य शुरू होने से जिले के किसानों में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है।
