प्रतापगढ़। 8 जनवरी 2024 को प्रतापगढ़ जिला कलेक्टर का पद संभालने वाली डॉ. अंजलि राजोरिया ने अपने कार्यकाल के दौरान प्रशासनिक सख्ती और जनहितकारी निर्णयों से एक अलग पहचान स्थापित की। उनका कार्यकाल न केवल प्रशासनिक दृढ़ता का प्रतीक रहा, बल्कि आमजन के लिए न्याय की उम्मीद भी बना।
नगर परिषद क्षेत्र में अवैध कब्जों के खिलाफ चलाए गए उनके अभियान ने पूरे जिले में एक मजबूत संदेश दिया। विशेष रूप से नदी-नालों के किनारे किए गए अवैध पक्के निर्माणों पर की गई सख्त कार्रवाई से भूमाफियाओं में हड़कंप मच गया। वर्षों से चले आ रहे अतिक्रमणों को हटाने का साहसिक कदम उठाकर उन्होंने प्रशासन की प्रभावशीलता को साबित किया।
डॉ. राजोरिया ने अपने कार्यकाल में करीब 100 से अधिक ‘69ई’ पट्टों के मामलों में संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की। इसके अलावा, एक सेवानिवृत्त आर्मी जवान पर दर्ज आर्म्स एक्ट के कथित फर्जी मुकदमे की पुनः जांच और चर्चित मुस्तफा सुसाइड केस की फाइल को दोबारा खोलने जैसे निर्णयों ने उनके न्यायप्रिय और निडर प्रशासनिक दृष्टिकोण को उजागर किया।
उनके फैसलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता साफ दिखाई दी, जिससे आमजन में प्रशासन के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ। डॉ. अंजलि राजोरिया का कार्यकाल उन अधिकारियों के लिए प्रेरणा है, जो प्रशासन को जनसेवा का माध्यम मानते हैं।
आज भी प्रतापगढ़ जिले के दीन-दुखियों की जुबान पर उनका नाम है। जब-जब अन्याय के खिलाफ आवाज उठेगी, तब-तब जिले की जनता उन्हें एक सख्त लेकिन संवेदनशील अधिकारी के रूप में याद करेगी।