चित्तौड़गढ़। मेवाड़ विश्वविद्यालय में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन ट्रेडिशनल नॉलेज, ग्रीन इकॉनमी एंड एंटरप्रेन्योरशिप ऑपर्च्युनिटीज फॉर रूरल डेवलपमेंट एंड सस्टेनेबल लाइवलीहुड (ICRDSL–2026)” का शुभारंभ शुक्रवार को स्वागत सत्र के साथ हुआ।
वैश्विक ज्ञान-विनिमय का सशक्त मंच-
स्वागत उद्बोधन में डीन एकेडमिक्स डॉ. दीपक व्यास ने देश-विदेश से आए विद्वानों का स्वागत करते हुए कहा कि यह सम्मेलन पारंपरिक ज्ञान, हरित अर्थव्यवस्था एवं ग्रामीण आजीविका के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करेगा। उन्होंने इसे वैश्विक ज्ञान-विनिमय का सशक्त मंच बताया।
अंतर्विषयक शोध को मिलेगा प्रोत्साहन-
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. आलोक मिश्रा ने कहा कि विश्वविद्यालय विविधता और समन्वय का प्रतीक है। उन्होंने सम्मेलन को अंतर्विषयक एवं बहुविषयक शोध को बढ़ावा देने वाला महत्वपूर्ण प्रयास बताया, जो विद्यार्थियों को नवाचार के लिए प्रेरित करेगा।
सतत विकास और युवाओं की भूमिका पर जोर-
मुख्य अतिथि भारतीय विदेश सेवा अधिकारी सिद्धार्थ राजहंस ने संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों का उल्लेख करते हुए भारत को “नॉलेज इकॉनमी” बनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने विकसित भारत–2047 के लक्ष्य में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया।
पर्यावरण और ग्रामीण विकास पर चर्चा-
एप्लाइड रिसर्च निदेशक डॉ. अजय कुमार ने पर्यावरणीय चुनौतियों पर चिंता जताते हुए कृषि, पर्यावरण और समाज के संतुलन की आवश्यकता बताई। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में सात अंतरराष्ट्रीय वक्ता भाग ले रहे हैं, जिससे इसे वैश्विक दृष्टिकोण मिला है।
‘रीच टू अनरीच’ पर विशेष जोर-
विशिष्ट अतिथि डॉ. प्रेम कुमार (आईआईएस, आईआईएमसी, नई दिल्ली) ने ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और संसाधनों की पहुंच बढ़ाने की आवश्यकता पर बल देते हुए “रीच टू अनरीच” की अवधारणा प्रस्तुत की।
पारंपरिक ज्ञान और उद्यमिता का महत्व-
डॉ. हनुमान प्रसाद (एमएलएसयू) ने पारंपरिक ज्ञान को उद्यमिता से जोड़ते हुए इसे समस्या समाधान और नवाचार का आधार बताया। वहीं, मेवाड़ एजुकेशन सोसाइटी के चेयरमैन गोविंद लाल गदिया ने विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनने और अपने शोध को व्यवहारिक रूप देने के लिए प्रेरित किया।
तकनीकी सत्र और सांस्कृतिक कार्यक्रम आकर्षण-
सम्मेलन के प्रथम दिन विभिन्न तकनीकी सत्रों में देश-विदेश के विद्वानों ने पारंपरिक ज्ञान, हरित अर्थव्यवस्था, उद्यमिता एवं सतत आजीविका पर शोधपत्र प्रस्तुत किए। सम्मेलन में प्लेनरी टॉक, कीनोट एवं आमंत्रित व्याख्यान भी आयोजित किए जा रहे हैं। सम्मेलन स्मारिका का विमोचन एवं सांस्कृतिक संध्या कार्यक्रम भी विशेष आकर्षण रहे। कार्यक्रम के अंत में संयोजक प्रो. साधना मंडलोई ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।