देवास। कोरोना काल की दर्दनाक यादों के बीच टोंकखुर्द क्षेत्र के ग्राम देवली से शुरू हुई एक छोटी सी पहल आज पूरे गांव को आस्था के रंग में रंग रही है। उस कठिन दौर में हुई असंख्य मौतों ने बच्चों के मन को झकझोर दिया और यहीं से सकारात्मक सोच के साथ प्रभातफेरी की शुरुआत हुई।
करीब तीन साल पहले कुछ बच्चों तक सीमित यह प्रयास अब जनआंदोलन बन चुका है। आज इसमें महिलाएं, पुरुष और युवा बड़ी संख्या में शामिल होते हैं। रोज सुबह 5 बजे निकलने वाली प्रभातफेरी गांव की गलियों से होते हुए मंदिरों तक पहुंचती है, जहां भजन-कीर्तन से माहौल भक्तिमय हो जाता है।
भजनों की मधुर धुन पर श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आते हैं। ग्रामीण भी इस प्रभातफेरी का भव्य स्वागत करते हैं-फूल बरसाते हैं, ध्वज की आरती उतारते हैं, रंगोली सजाते हैं और दीप जलाकर श्रद्धा व्यक्त करते हैं।
कोरोना काल में शुरू हुई यह पहल अब एक मजबूत परंपरा बन चुकी है जो न सिर्फ आस्था को बढ़ा रही है, बल्कि नई पीढ़ी को संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने का काम भी कर रही है।