चित्तौड़गढ़। संघ के शताब्दी वर्ष के अंतर्गत प्रबुद्ध जन संगोष्ठी का आयोजन कूकड़ा रिसॉर्ट परिसर में किया गया। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े प्रबुद्ध नागरिकों की अच्छी भागीदारी रही।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय कार्यकारणी सदस्य गुणवंत सिंह कोठारी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्य किसी के विरोध में नहीं, बल्कि समाज को संगठित और सशक्त बनाने के लिए है। उन्होंने संघ के मूल मंत्र “सर्वेषाम् अविरोधेन” को रेखांकित करते हुए सभी के साथ समन्वय से कार्य करने की बात कही।
विभाग कार्यवाह दिनेश भट्ट ने कार्यक्रम की भूमिका रखते हुए बताया कि संघ की 100 वर्षों की यात्रा के बाद अब विचारों को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके लिए सभी लोगों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
“पंच परिवर्तन” पर विशेष बल
गुणवंत सिंह कोठारी ने समाज परिवर्तन के लिए “पंच परिवर्तन” की अवधारणा प्रस्तुत की, जिसमें शामिल हैं
ऽ सामाजिक समरसता
ऽ मजबूत पारिवारिक व्यवस्था
ऽ पर्यावरण संरक्षण
ऽ स्व-बोध (अपनी पहचान)
ऽ नागरिक कर्तव्यों का पालन
उन्होंने समाज में ऊंच-नीच और भेदभाव खत्म करने, परिवारों में संवाद बढ़ाने, पर्यावरण संरक्षण के लिए पेड़-पौधों की रक्षा और प्लास्टिक उपयोग कम करने पर जोर दिया।
साथ ही उन्होंने भारतीय संस्कृति, इतिहास और परंपराओं पर गर्व करने तथा ट्रैफिक नियमों का पालन, कर भुगतान और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा जैसे नागरिक कर्तव्यों को निभाने की अपील की।
मंच पर जिला संघचालक अनिरुद्ध सिंह भाटी और विभाग संघचालक हेमंत जैन उपस्थित थे।
कार्यक्रम के अंत में अनिरुद्ध सिंह भाटी ने सभी का धन्यवाद प्रस्तुत करते हुए उन्होंने सभी से राष्ट्र निर्माण और समाज विकास में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।