रतलाम। उज्जैन-जावरा ग्रीन फील्ड सड़क परियोजना के लिए अधिगृहीत की जा रही जमीनों के मुआवजे को लेकर विवाद गहरा गया है। आलोट विधानसभा के 8 गांवों के किसानों को बाजार दर से बेहद कम मुआवजा मिलने के विरोध में शनिवार को विधायक चिंतामणी मालवीय ग्रामीणों के साथ कलेक्ट्रेट की सीढ़ियों पर धरने पर बैठ गए।
विधायक ने सख्त लहजे में प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि किसानों की बात नहीं सुनी गई, तो जिंदाबाद के नारे मुर्दाबाद में बदल सकते हैं। अंततः कलेक्टर मिशा सिंह को खुद चेंबर से बाहर निकलकर सीढ़ियों पर आना पड़ा।
जावरा ग्रामीण एसडीएम ने विधायक को चेंबर में बुलाने की कोशिश की, लेकिन मालवीय ने स्पष्ट मना कर दिया। उन्होंने कहा कि ष्कलेक्टर को जनता के बीच आना चाहिए। 15 मिनट तक इंतजार करने के बाद विधायक ने अधिकारियों से कहा, अभी हम शांति से बैठे हैं, वरना हमें दूसरा रूप भी दिखाना आता है।
अभी जिंदाबाद बोल रहे हैं, फिर मुर्दाबाद भी बोलना जानते हैं। इसके बाद कलेक्टर ने बाहर आकर किसानों की बात सुनी और बाद में प्रतिनिधिमंडल के साथ चेंबर में 10 मिनट चर्चा की। उन्होंने 8 गांवों का क्लस्टर बनाकर अधिकतम मुआवजे के लिए अध्ययन करने का आश्वासन दिया है।
विधायक मालवीय और किसान संघ ने मुआवजे की विसंगतियों को आंकड़ों के जरिए स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि प्रशासन की गाइडलाइन के अनुसार मुआवजा मात्र ₹2.20 लाख से ₹2.50 लाख प्रति बीघा तय किया गया है।
दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर और 8-लेन के पास होने के कारण इन जमीनों का वास्तविक बाजार मूल्य ₹80 लाख से ₹1.5 करोड़ प्रति बीघा तक है। विधायक ने तर्क दिया कि हम विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन किसानों को बर्बाद नहीं होने देंगे। सरकार का विरोध नहीं, प्रशासन की कार्यप्रणाली का विरोध है।