मंदसौर। प्रदेश में 14 से 18 वर्ष तक के बच्चों को खतरनाक उद्योगों एवं प्रक्रियाओं में नियोजित करना पूर्णतः प्रतिबंधित है। श्रम विभाग द्वारा श्रम स्टार रेटिंग के अंतर्गत बाल श्रम अथवा बंधुआ श्रम पाए जाने पर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति लागू करते हुए संबंधित संस्थान को शून्य अंक देने का प्रावधान किया गया है। इस संबंध में सभी श्रम अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन संस्थानों में बाल या बंधुआ श्रमिक नियोजित नहीं हैं, उन्हें अन्य मापदंडों में आंशिक कमी होने पर भी श्रम स्टार रेटिंग प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
नियमित समीक्षा और निगरानी जारी-
श्रम विभाग द्वारा ‘वेदा’ पहल के अंतर्गत प्रदेश में बाल श्रम उन्मूलन के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत प्रत्येक शुक्रवार को समीक्षा बैठक आयोजित की जा रही है तथा अभियोजन मामलों की कड़ी निगरानी की जा रही है। साथ ही चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 (टोल-फ्री, 24Û7) पर प्राप्त शिकायतों पर भी सतत मॉनिटरिंग की जा रही है।
कड़े दंड का प्रावधान-
बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के तहत दोषी पाए जाने पर 20 हजार से 50 हजार रुपये तक का जुर्माना एवं 6 माह से 2 वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है। वहीं बंधुआ श्रम पद्धति (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 के अंतर्गत अधिकतम 3 वर्ष की सजा या 2 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
पुनर्वास के लिए आर्थिक सहायता-
बंधुआ श्रमिकों के पुनर्वास हेतु केंद्र प्रवर्तित योजना 2021 के तहत वयस्क पुरुष श्रमिकों को 1 लाख रुपये, महिला एवं अनाथ बच्चों को 2 लाख रुपये तथा शारीरिक शोषण या मानव तस्करी के पीड़ितों को 3 लाख रुपये तक की सहायता प्रदान की जाती है। प्रत्येक जिले में इसके लिए कॉर्पस फंड भी स्थापित किया गया है। श्रम विभाग ने आमजन से अपील की है कि बाल श्रम या बंधुआ श्रम की किसी भी सूचना को तुरंत हेल्पलाइन पर दर्ज कराएं, ताकि त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।