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April 5, 2026, 10:51 am
KHABAR : मुरैना के रैपुरा में पानी का घोटाला बेनकाब, करोड़ों खर्च, फिर भी सूखे नल, नल-जल योजना कागजों में पूरी, जमीनी हकीकत में फेल, ग्रामीणों ने की उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग, पढे़ खबर

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मुरैना। रैपुरा में नल-जल योजना बनी “घोटाले की धार”३ करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद गांव के लोग आज भी पानी की एक-एक बूंद को तरस रहे हैं। मुरैना जिले की पोरसा तहसील के ग्राम पंचायत रैपुरा में सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना अब बड़े सवालों के घेरे में है। योजना का निर्माण कार्य महेरे कंस्ट्रक्शन द्वारा कराया गया, लेकिन हकीकत यह है कि यह योजना लंबे समय से बंद पड़ी है और गांव के घरों तक पानी आज तक नहीं पहुंच सका।


ग्रामीणों का आरोप है कि इस योजना को कागजों में पूर्ण दिखाकर करोड़ों रुपये का भुगतान निकाल लिया गया, जबकि जमीनी स्तर पर न तो काम सही तरीके से हुआ और न ही पानी की सप्लाई शुरू हो पाई। गांव में लगे नल सूखे पड़े हैं, पाइपलाइन बेकार साबित हो रही है और भीषण गर्मी में लोग पानी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। महिलाओं और बुजुर्गों को दूर-दराज से पानी लाना पड़ रहा है, जिससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हो रही है।


इस पूरे मामले ने अब भ्रष्टाचार की बू को और तेज कर दिया है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता, तकनीकी खामियों और भुगतान प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब योजना शुरू ही नहीं हुई, तो आखिर करोड़ों का भुगतान कैसे हो गया? क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने बिना जांच के फाइल पास कर दी, या फिर इस पूरे खेल में कहीं न कहीं मिलीभगत है?


ग्रामीणों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ रहा है। उन्होंने प्रशासन से इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है, साथ ही महेरे कंस्ट्रक्शन और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करने की बात कही है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि नल-जल योजना को जल्द से जल्द चालू किया जाए और गांव के हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जाए।


रैपुरा की यह तस्वीर अब सिर्फ पानी की किल्लत तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल बन चुकी है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी जब जनता प्यासे रहने को मजबूर हो, तो यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सिस्टम पर सीधा सवाल है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस कथित ‘पानी के घोटाले’ पर क्या कार्रवाई करता है, या फिर भ्रष्टाचार की यह कहानी यूं ही दबा दी जाएगी।

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