मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के गरोठ में रहने वाले एक साधारण परिवार की दो माह की मासूम बेटी सृष्टि सोनी स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) नामक दुर्लभ और घातक आनुवंशिक बीमारी से जूझ रही है। इस बीमारी के इलाज के लिए जरूरी Zolgensma इंजेक्शन की अनुमानित लागत करीब ९ . 40 करोड़ रुपये तक बताई जा रही है, जो इस गरीब परिवार की पहुंच से पूरी तरह बाहर है। परिवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से आर्थिक सहायता की गुहार लगाई है।
परिवार की पृष्ठभूमि और खुशी का क्षण
गौरव सोनी गरोठ की गुप्तेश्वर कॉलोनी में रहते हैं। वे छोटा सा साइकिल और मोटरसाइकिल पंचर बनाने का काम करते हैं। उनके पिता अनिल सोनी भी इसी काम में उनके साथ हैं। तीन साल पहले शादी के बाद गौरव और उनकी पत्नी पूजा को सोनी लंबे समय से संतान की कामना कर रहे थे। नजदीक के प्रसिद्ध मां दुधाखेड़ी धाम (मां दुर्गा खेड़ी) में मन्नत मांगी थी। तीन साल की प्रतीक्षा के बाद जनवरी २०२६ के आसपास सस्ती सोनी का जन्म हुआ। पूरे परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। बेटी के जन्म को परिवार ने मां दुर्गा की कृपा माना।
लेकिन जन्म के कुछ ही हफ्तों बाद बच्ची में असामान्य लक्षण दिखने लगे। सांस लेने में तकलीफ, हाथ-पैरों की गतिविधियां शिथिल होना और कमजोरी के संकेत दिखाई दिए। परिवार चिंतित हो गया। सबसे पहले कोटा ले जाया गया, फिर इंदौर और अंत में जयपुर के जे.के. लोन अस्पताल पहुंचे।
बीमारी की पुष्टि और सदमा
जे.के. लोन अस्पताल, जयपुर में डॉ. प्रियांशु माथुर के अधीन उपचार के दौरान २२ मार्च २०२६ को बेंगलुरु की MedGenome Labs Limited से DNA टेस्ट रिपोर्ट आई। रिपोर्ट में स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) की पुष्टि हुई। यह एक गंभीर आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें शरीर की मोटर न्यूरॉन्स प्रभावित होते हैं। इससे मांसपेशियां कमजोर होती जाती हैं, जिससे बच्चा सिर उठाने, बैठने, खाने-पीने और सांस लेने जैसी बुनियादी गतिविधियां नहीं कर पाता। SMA टाइप-१ सबसे गंभीर रूप है, जिसमें बिना उपचार के ज्यादातर बच्चे दो साल की उम्र से पहले अपनी जान गंवा देते हैं।
डॉक्टरों ने बताया कि इस बीमारी का एकमात्र प्रभावी उपचार Zolgensma नामक जीन थेरेपी इंजेक्शन है, जो अमेरिका से मंगवाना पड़ता है। भारत में यह उपलब्ध नहीं है। परिवार को दूसरी संतान की योजना बनाने से भी सख्त मना किया गया है, क्योंकि आनुवंशिक खतरा हो सकता है।
गौरव सोनी बताते हैं, “बच्ची के जन्म पर पूरा परिवार खुश था, लेकिन बीमारी की खबर मिलते ही सदमा लग गया। हमने कोटा, इंदौर और जयपुर तक दौड़ लगाई। बेंगलुरु से रिपोर्ट आने पर होश उड़ गए। डॉक्टरों ने साफ कहा कि यह इंजेक्शन ही एकमात्र उम्मीद है।”
दादाअनिल सोनी कहते हैं, “बेटी होने की खुशी मनाते ही नहीं बन रही थी। सांस लेने और हाथ-पैर हिलाने में दिक्कत देखकर हम चिंतित हो गए। इतना भारी इलाज हम जैसे साधारण परिवार नहीं उठा सकते। सरकार की बेटी बचाओ, लाड़ली लक्ष्मी और लाड़ली बहन जैसी योजनाएं चल रही हैं। हमें उम्मीद है कि इस बेटी की रक्षा के लिए शासन हाथ बढ़ाएगा।”
मां सृष्टि सोनी भावुक होकर बताती हैं, “तीन साल की मन्नत के बाद घर में खुशी आई थी, लेकिन अब वही खुशी तिल-तिल कर परेशान कर रही है। पूरा परिवार सदमे में है।”
इलाज की चुनौती और लागत
Zolgensma दुनिया की सबसे महंगी दवाओं में से एक है। यह एक बार का इंजेक्शन है, जो दो साल से कम उम्र के बच्चों में SMA के इलाज के लिए इस्तेमाल होता है। यह दोषपूर्ण SMN1 जीन को सही जीन से बदलकर मोटर न्यूरॉन्स की रक्षा करता है। भारत में इसकी अनुमानित लागत ९ करोड़ से १७ करोड़ रुपये तक बताई जाती है (कर और अन्य खर्चों सहित)। परिवार ने पत्र में ९ करोड़ ४० लाख रुपये का उल्लेख किया है, जो डॉक्टर की सलाह पर आधारित है।
गौरव सोनी का कहना है कि उनका परिवार बहुत साधारण है। साइकिल पंचर का छोटा काम करके गुजारा चलता है। इतनी बड़ी राशि जुटाना उनके लिए असंभव है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सहायता मांगी है। साथ ही प्रदेश के मुख्यमंत्री, स्थानीय विधायक और सांसद को भी गुहार लगाई है।
परिवार की अपील
गौरव सोनी ने प्रधानमंत्री को संबोधित पत्र में लिखा है:
“महोदय, हमारा परिवार आपकी विधानसभा क्षेत्र गरोठ और संसदीय क्षेत्र मंदसौर-जावरा से संबंधित है। मेरी दो माह की पुत्री सृष्टि सोनी SMA से पीड़ित है। डॉक्टरों के अनुसार Zolgensma इंजेक्शन से ही इलाज संभव है, जिसकी लागत ९ करोड़ ४० लाख रुपये है। हम गरीब हैं, इतनी राशि का प्रबंधन नहीं कर सकते। कृपया हमारे इस मासूम बच्ची के जीवन को बचाने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करें। आपकी यह दया हमारी बच्ची को नया जीवन देगी और पूरा परिवार सदैव आपका आभारी रहेगा।”
परिवार का मोबाइल नंबर: गौरव सोनी - ८३४९३०३७९६, अनिल सोनी - ९९२६०२७५७६। ईमेल: [email protected]
SMA: एक दुर्लभ लेकिन घातक बीमारी
स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी एक अनुवांशिक विकार है, जो दुनिया भर में हर ६,००० से १०,००० जन्मों में एक बच्चे को प्रभावित करता है। भारत में भी कई ऐसे मामले सामने आते रहते हैं। Zolgensma जैसी जीन थेरेपी ने कई देशों में बच्चों की जान बचाई है, लेकिन इसकी बेहद ऊंची कीमत गरीब परिवारों के लिए बड़ी बाधा बन जाती है। कुछ राज्यों और अस्पतालों में कंपैशनेट यूज या कंपनी के प्रोग्राम के तहत मुफ्त या सहायता मिली है, लेकिन ज्यादातर मामलों में क्राउडफंडिंग या सरकारी मदद की जरूरत पड़ती है।
यह मामला न केवल एक परिवार की पीड़ा को दर्शाता है, बल्कि दुर्लभ बीमारियों के इलाज की महंगाई और सरकारी सहायता की जरूरत को भी उजागर करता है। गरोठ के इस साधारण परिवार को उम्मीद है कि मानवीय दृष्टिकोण से शासन स्तर पर मदद मिलेगी और छोटी सी सृष्टि सोनी को नया जीवन मिल सकेगा।
ऐसी दुर्लभ बीमारियों में समय पर इलाज महत्वपूर्ण होता है। समाज और सरकार दोनों से अपील है कि इस मासूम बच्ची की मदद के लिए आगे आएं।