उज्जैन। संभागायुक्त एवं सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह ने सोमवार को सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत निर्माणाधीन जल परियोजनाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने सिलारखेड़ी-सेवरखेड़ी परियोजना को नेट-जीरो एनर्जी मॉडल पर संचालित करने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान कान्ह क्लोज डक्ट परियोजना में काम की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने निर्माण कंपनी पर 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाने के निर्देश दिए।
उज्जैन में आगामी सिंहस्थ मेले को ध्यान में रखते हुए करीब 1500 करोड़ रुपए की लागत वाली सिलारखेड़ी-सेवरखेड़ी और कान्ह क्लोज डक्ट परियोजनाओं का जायजा लेने पहुंचे संभागायुक्त एक्शन मोड में नजर आए। कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट परियोजना की धीमी गति पर उन्होंने सख्ती दिखाई और एक सप्ताह में कार्य में सुधार नहीं होने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी।
सौर ऊर्जा से चलेगी परियोजना, खर्च होगा शून्य
आशीष सिंह ने कहा कि सेवरखेड़ी बैराज से पानी लिफ्ट करने के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग किया जाए, जिससे परियोजना शून्य खर्च आधारित बन सके। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सेवरखेड़ी जलाशय के आसपास बड़े स्तर पर सोलर पैनल स्थापित करने की योजना तैयार की जाए, ताकि पानी लिफ्ट करने में लगने वाली बिजली की पूर्ति सौर ऊर्जा से हो सके। इससे परियोजना का संचालन बिना अतिरिक्त ऊर्जा खर्च के संभव होगा और यह पूरी तरह ग्रीन एनर्जी आधारित बनेगी।
300 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित होगा जलाशय
परियोजना के तहत मानसून के दौरान सेवरखेड़ी बैराज से लगभग 51 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी लिफ्ट कर सिलारखेड़ी जलाशय में संग्रहित किया जाएगा। करीब 300 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित हो रहे इस जलाशय के आसपास सोलर पैनल लगाए जाएंगे, जिससे बिजली खर्च शून्य रहेगा और संचालन पर्यावरण के अनुकूल होगा। परियोजना को दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।