उज्जैन। अकोदिया निवासी आसिफ एवं उनकी पत्नी शाहीन अपनी पाँच माह की पुत्री जैनब को उल्टी और बुखार की शिकायत होने पर जिला चिकित्सालय, चरक भवन लेकर पहुंचे। शिशु रोग विशेषज्ञ द्वारा जांच करने पर पाया गया कि बच्ची को तत्काल अस्पताल में भर्ती कर उपचार की आवश्यकता है। बच्ची अत्यंत कमजोर थी और उसका वजन काफी कम था, जो कुपोषण के स्पष्ट लक्षण थे।
माता शाहीन ने बताया कि वे बच्ची को उम्र के अनुसार दूध पिलाती हैं, इसके बावजूद उसकी स्थिति में सुधार नहीं हो रहा था। चिकित्सकों ने सलाह दी कि यदि जैनब को पोषण पुनर्वास केंद्र में लगभग दो सप्ताह तक भर्ती कर विशेष उपचार एवं पोषण संबंधी देखभाल दी जाए, तो उसे कुपोषण से पूर्ण रूप से मुक्त किया जा सकता है।
माता-पिता चिकित्सकों की सलाह से सहमत हुए और जैनब को जिला चिकित्सालय में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया गया। केंद्र में दो सप्ताह तक आवश्यक जांच, उपचार एवं विशेष पोषण प्रबंधन किया गया।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अशोक कुमार पटेल के मार्गदर्शन में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. पूजा गेहलोत, पोषण प्रशिक्षक सोनल ठाकुर तथा संपूर्ण स्टाफ द्वारा बच्ची की निरंतर निगरानी की गई।
दो सप्ताह के नियमित उपचार और उचित पोषण के बाद जैनब का वजन बढ़कर 2 किलो 970 ग्राम हो गया। अब बच्ची स्वस्थ है और उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। चिकित्सकों द्वारा उसे स्तनपान जारी रखने तथा उचित आहार संबंधी विस्तृत परामर्श दिया गया।
माता-पिता ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि उनकी पुत्री गंभीर कुपोषण से मुक्त हो गई है। पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती अवधि के दौरान जैनब को सभी उपचार एवं स्वास्थ्य सेवाएं निःशुल्क प्रदान की गईं। साथ ही डिस्चार्ज के समय माता-पिता को प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की गई।