मंदसौर। कलेक्टर अदिती गर्ग ने आज ग्राम गुलियाना में किसान जगदीश माली के खेत पर पहुंचकर अलसी के डंठलों को बेलर मशीन की सहायता से एकत्रित करने की प्रक्रिया का अवलोकन किया।
जिले में कृषि अपशिष्ट के प्रभावी उपयोग एवं किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से अलसी के डंठल से रेशा (फाइबर) निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल प्रारंभ की जा रही है। इस दौरान सीईओ जिला पंचायत अनुकूल जैन, मंदसौर ग्रामीण एसडीएम, कृषि विभाग के अधिकारी तथा एफपीओ से जुड़े किसान उपस्थित रहे।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने निर्देश दिए कि डंठलों के संग्रहण के पश्चात उनकी मशीनों के माध्यम से शीघ्र प्रोसेसिंग शुरू की जाए। उन्होंने कहा कि जिले में उपलब्ध मशीनों का उपयोग करते हुए कच्चे माल से लेकर धागा एवं रेशा निर्माण तक की संपूर्ण प्रक्रिया को सुव्यवस्थित रूप से विकसित किया जाए।
उन्होंने एफपीओ एवं संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि इस कार्य के लिए खरीदारों से समन्वय स्थापित कर मजबूत मार्केट लिंक तैयार किया जाए, जिससे उत्पाद को उचित मूल्य मिल सके।
एफपीओ द्वारा जानकारी दी गई कि अलसी के डंठलों के भंडारण हेतु लोहे के शेड का निर्माण किया जा रहा है, जहां इन्हें सुरक्षित रखकर आगे फाइबर उत्पादन किया जाएगा। साथ ही स्थानीय स्तर पर मशीन निर्माण के प्रयास भी किए जा रहे हैं, जिनसे रेशा तैयार किया जाएगा।
कलेक्टर ने परिवहन लागत (डबल ट्रांसपोर्ट) को कम करने पर जोर देते हुए कहा कि किसानों को प्रोत्साहित किया जाए कि वे अपने खेत या घर पर ही डंठलों का संग्रहण करें और सीधे खरीदारों को विक्रय करें, जिससे अनावश्यक खर्च में कमी आएगी। इस दौरान अलसी से तेल उत्पादन की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई।
जिले में नरवाई प्रबंधन के तहत यह पहल विशेष महत्व रखती है। नरवाई जलाने से मिट्टी की उर्वरता एवं पर्यावरण को होने वाले नुकसान को देखते हुए प्रशासन द्वारा वैकल्पिक उपायों को बढ़ावा दिया जा रहा है। अलसी के डंठलों का उपयोग कर फाइबर निर्माण न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक होगा, बल्कि किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत भी प्रदान करेगा।
वर्तमान में जिले में लगभग 9 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में अलसी की खेती की जा रही है, जो रबी सीजन की एक महत्वपूर्ण सहायक फसल के रूप में उभर रही है। इस नवाचार से जिले में कृषि आधारित उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा।