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April 13, 2026, 1:39 pm
BIG NEWS : धमाके के साथ ढहा सीसीआई का प्री-हीटर टावर, टूट गई हजारों उम्मीदें, नीमच के औद्योगिक इतिहास का एक युग समाप्त, चंद सेकंड में मलबे में बदला 40 साल पुराना गौरव, ध्वस्तीकरण का मंजर देख भावुक हुए स्थानीय लोग, पढ़े खबर 

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नीमच। कभी हजारों परिवारों की रोजी-रोटी और जिले की औद्योगिक पहचान रहा नयागांव स्थित सीमेंट कॉर्पाेरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) प्लांट अब इतिहास बनता जा रहा है। दशकों तक वीरान पड़े इस विशाल औद्योगिक परिसर के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया के तहत इसकी पहचान बने गगनचुंबी प्री-हीटर टावर को नियंत्रित ब्लास्ट के जरिए कुछ ही सेकंड में जमींदोज कर दिया गया। धमाके के साथ उठे धूल के गुबार ने न सिर्फ एक इमारत को गिराया, बल्कि एक पूरे दौर की यादों को भी बिखेर दिया।

537 हेक्टेयर में फैला था विशाल औद्योगिक परिसर-
नीमच से करीब 18 किलोमीटर दूर और जावद रोड रेलवे स्टेशन से लगभग 1.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह प्लांट 537.606 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ था। इसमें से 32.250 हेक्टेयर में मुख्य प्लांट स्थापित था, जबकि 450.042 हेक्टेयर क्षेत्र खनन (माइनिंग) के लिए निर्धारित था। इसके अलावा 18.160 हेक्टेयर में कर्मचारियों के लिए एक सुव्यवस्थित टाउनशिप विकसित की गई थी। टाउनशिप में 575 आवासीय मकान, हेल्थ सेंटर, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, बैंक, पोस्ट ऑफिस और टेलीफोन एक्सचेंज जैसी सुविधाएं उपलब्ध थीं, जो इसे एक पूर्ण औद्योगिक नगर का स्वरूप देती थीं।

उत्पादन क्षमता और स्वर्णिम दौर-
इस प्लांट में 1 मार्च 1982 को 1200 टन प्रतिदिन (टीपीडी) क्षमता के साथ उत्पादन शुरू हुआ था। बाद में 1 मई 1990 को इसका विस्तार करते हुए नई क्लिंकराइजेशन यूनिट जोड़ी गई। ड्राई प्रोसेस तकनीक पर आधारित इस संयंत्र की वार्षिक उत्पादन क्षमता 4 लाख मीट्रिक टन सीमेंट और 10 लाख मीट्रिक टन क्लिंकर थी। यहां उच्च गुणवत्ता वाला ऑर्डिनरी पोर्टलैंड सीमेंट (ओपीसी) और पॉज़ोलाना पोर्टलैंड सीमेंट (पीसीसी) तैयार किया जाता था, जिसकी मांग दूर-दराज तक रहती थी।

आर्थिक संकट बना बंद होने की वजह-
इतनी विशाल क्षमता और संसाधनों के बावजूद यह सरकारी उपक्रम कुप्रबंधन और वित्तीय संकट का शिकार हो गया। नकदी की कमी के चलते संचालन प्रभावित हुआ और अंततः 30 जून 1997 को बिजली बिल जमा नहीं हो पाने के कारण बिजली विभाग ने प्लांट की विद्युत आपूर्ति काट दी। इसके साथ ही मशीनें थम गईं और प्लांट पर हमेशा के लिए ताला लग गया।

एक युग का अंत, यादें रह गईं शेष-
वर्षों तक खामोश पड़े इस प्लांट को अब नीलामी के बाद पूरी तरह ध्वस्त किया जा रहा है। प्री-हीटर टावर का बारूदी धमाके के साथ गिरना नयागांव वासियों के लिए सिर्फ एक ढांचे का गिरना नहीं, बल्कि उस औद्योगिक युग का अंत है जिसने कभी इस क्षेत्र को पहचान और रोजगार दिया था। आज जब यह धरोहर मलबे में तब्दील हो रही है, तब स्थानीय लोगों के लिए यह दृश्य भावुक कर देने वाला है- एक ऐसा अध्याय, जो अब सिर्फ यादों में ही जीवित रहेगा।

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