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April 25, 2026, 11:06 am
KHABAR : व्हाट्सएप स्टेटस बना जीवनदान का जरिया, घट्टिया पुलिस ने फांसी लगाने जा रहे दंपत्ति को बचाया, थाना प्रभारी करण खोवाल की सूझबूझ से टली अनहोनी, पढे़ खबर 

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उज्जैन/घट्टिया। “जाको राखे साइयां, मार सके न कोय”-यह कहावत ग्राम नजरपुर में उस समय चरितार्थ हो गई जब मौत और जिंदगी के बीच झूल रहे एक दंपत्ति के लिए घट्टिया पुलिस फरिश्ता बनकर पहुंची। थाना प्रभारी की सूझबूझ और टीम की तत्परता से आत्महत्या का प्रयास कर रहे पति-पत्नी को समय रहते बचा लिया गया।


मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम नजरपुर निवासी आसिफ पिता शफीक अहमद पटेल और उसकी पत्नी रीना पटेल अपने पिता शफीक पटेल से घरेलू झगड़े से प्रताड़ना से काफी समय से परेशान थे। मानसिक तनाव और पारिवारिक विवाद के चलते दंपत्ति ने खौफनाक कदम उठाने का फैसला किया। आसिफ ने आत्महत्या करने से पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वॉट्सएप पर स्टेटस डाला, जिसमें उसने अपने परिवार से परेशान होकर जीवन में कुछ नहीं बचना बताया।


थाना प्रभारी की सूझबूझ ने बची जान
विवादित मैसेज की जानकारी घट्टिया थाना प्रभारी करण खोवाल को मिली, उन्होंने बिना एक पल की देरी किए अपनी टीम के साथ नजरपुर पेट्रोलिंग को रवाना हुए मौके पर पहुँचने पर घर का दरवाजा अंदर से बंद मिला।


खिड़की से झांकने पर पुलिस के होश उड़ गए; दोनों पति-पत्नी फांसी की रस्सी गले में डाले हुए थे।
थाना प्रभारी करण खोवाल ने मौके पर धैर्य दिखाते उन्होंने दंपत्ति का ध्यान भटकाने के लिए उनसे बाहर से बातचीत जारी रखी, ताकि वे विचलित न हों इसी बीच थाना प्रभारी द्वारा पुलिस टीम को गुप्त रूप से दूसरे दरवाजे से अंदर घुसने का इशारा किया गया।


पुलिस ने फुर्ती दिखाते हुए दरवाजा तोड़ा और फंदे पर झूल रहे आसिफ और रीना को तत्काल नीचे उतारा।
गनीमत रही कि उस समय दोनों की सांसें चल रही थीं। पुलिस ने उन्हें संभाला और तुरंत शासकीय अस्पताल घट्टिया में भर्ती कराया। समय पर इलाज मिलने से अब दोनों खतरे से बाहर हैं।


होश में आने के बाद दंपत्ति ने अपने पिता शफीक द्वारा प्रताड़ित किए जाने की बात दोहराई है और उसी से तंग होकर फांसी का कदम उठाना बताया। थाना प्रभारी ने उन्हें समझा-बुझाकर ढांढस बंधाया और मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया। पूरे मामले में थाना प्रभारी करण खोवाल, उपनिरीक्षक अलकेश डांगे(बीट नजरपुर),प्रधान आरक्षक राजेंद्र राठौर की सराहनीय भूमिका रही।


आज के दौर में जहां पुलिस को अक्सर आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है, वहीं करण खोवाल और उनकी टीम ने अपनी कर्तव्यनिष्ठा से यह सिद्ध कर दिया कि पुलिस समाज की रक्षक है। उनकी इस सजगता की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है।

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