शिवपुरी। जिले के कोलारस जनपद की कोटा पंचायत के छिपौल गांव में मूलभूत सुविधाओं की बदहाली सामने आई है। यहां के ग्रामीण पिछले कई सालों से नदी का गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। गांव में एकमात्र हैंडपंप वर्षों से खराब पड़ा हुआ है, लेकिन बार-बार शिकायत के बावजूद पीएचई विभाग और प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
गांव के लोगों का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। हालात यह हैं कि करीब 1500 की आबादी वाला यह गांव आज भी साफ पेयजल के लिए तरस रहा है।
नदी का पानी भी गंदा
ग्रामीणों के अनुसार, गांव में नदी ही जलापूर्ति का एकमात्र साधन बन चुकी है। इसी नदी के पानी को पीने के साथ-साथ नहाने और अन्य दैनिक उपयोग में लिया जा रहा है। गंदा पानी पीने से गांव में बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है।
गर्मी के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। जब नदी सूखने लगती है, तब ग्रामीणों को नदी में गड्ढे खोदकर पानी निकालना पड़ता है और उसी पानी का उपयोग करना पड़ता है।
गड्ढा खोदकर पानी पीने को मजबूर
नदी से पानी भरने पहुंची ग्रामीण गौरी ने बताया कि उन्हें करीब तीन साल हो गए इस परेशानी को झेलते हुए, लेकिन अब तक किसी ने सुध नहीं ली। उन्होंने कहा कि गंदा पानी पीने से लोग बीमार भी पड़ते हैं, लेकिन उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है।
तीन साल से हैंडपंप खराब
महिला घीसू ने बताया कि गांव में एक हैंडपंप था, जो पिछले तीन साल से खराब पड़ा है। इसके कारण पूरे गांव को नदी के पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
मोहन सिंह आदिवासी ने बताया कि गंदा पानी पीने से बच्चे और बुजुर्ग अक्सर बीमार पड़ जाते हैं, जिससे उन्हें इलाज के लिए बाहर जाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई।
ग्रामीण बोले- चुनाव के बाद गायब हो गए नेता
ग्रामीण सुआलाल ने बताया कि अभी नदी में थोड़ा पानी बचा है, लेकिन अगले एक महीने में वह भी सूख जाएगा। इसके बाद उन्हें नदी में कई गड्ढे खोदकर पानी निकालना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि विधायक और सांसद तक शिकायत की गई, लेकिन कहीं से भी राहत नहीं मिली।
ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय नेता गांव में आते हैं और विकास के बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद कोई लौटकर नहीं आता।
वहीं इस मामले में पीएचई विभाग के ईई शुभम अग्रवाल का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में आया है और मौके पर उपयंत्री को भेजा गया है। उन्होंने बताया कि गांव के एक हैंडपंप में मोटर फंसी हुई है और दूसरा हैंडपंप पुराना होने के कारण पानी नहीं दे रहा।
गांव के लिए पहले भी प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। उन्होंने आश्वासन दिया कि एक सप्ताह के भीतर गांव में स्वच्छ पानी की व्यवस्था का कोई न कोई समाधान निकाला जाएगा, ताकि ग्रामीणों को नदी का गंदा पानी न पीना पड़े।