रतलाम। उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास आरके सिंह ने बताया कि जिले में नरवाई जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए किसानों को निरंतर समझाइश दी जा रही है। साथ ही आधुनिक मशीनों के डेमो एवं प्रशिक्षण के माध्यम से नरवाई प्रबंधन के लिए जागरूक किया जा रहा है। किसानों को नरवाई जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में भी जानकारी दी जा रही है। इसके बावजूद नियमों का उल्लंघन करने वाले किसानों पर शासन के निर्देशानुसार अर्थदंड की कार्रवाई की जा रही है।
सेटेलाइट से प्राप्त डाटा के अनुसार जिले में अब तक नरवाई जलाने की 296 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें से 114 प्रकरणों में कार्रवाई करते हुए किसानों पर कुल 1,10,000 रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया जा चुका है, जबकि शेष प्रकरणों में कार्रवाई प्रक्रियाधीन है।
तहसीलवार आंकड़ों के अनुसार रतलाम ग्रामीण में 53, रतलाम शहर में 36, ताल में 37, आलोट में 78, जावरा में 30, पिपलौदा में 51, बाजना में 4 तथा सैलाना में 7 घटनाएं दर्ज की गई हैं।
प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि फसलों के अवशेष (नरवाई) को जलाने के बजाय आधुनिक तकनीकों से खाद में परिवर्तित करें, जिससे मृदा की उर्वरकता बढ़े, पोषक तत्व संरक्षित रहें तथा जलधारण क्षमता में वृद्धि हो। साथ ही जलवायु अनुकूल खेती की दिशा में कदम बढ़ाने का भी आह्वान किया गया है।