BREAKING NEWS
BIG NEWS : नीमच जिले के इन गांवों में मचा था मगरमच्छ.. <<     KHABAR : एमपी के शाजापुर में नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0.. <<     NMH MANDI : एक क्लिक में पढ़े कृषि उपज मंडी नीमच के.. <<     KHABAR : शिक्षा की मुस्कान, पालक संघ ने नौनिहालों.. <<     BIG NEWS : नशामुक्ति का संदेश देकर संपन्न हुई एसपी.. <<     NEWS : श्रावण मास में उज्जैन स्टेशन पर विशेष.. <<     NEWS : 51 कन्या पूजन और संतों के महाप्रसाद के साथ.. <<     NEWS : महाकाल की नगरी को निकले कांवड़ियों का मधुबन.. <<     MANDI BHAV : एक क्लिक में पढ़े कृषि उपज मंडी मनासा के.. <<     BIG REPORT : कुकड़ेश्वर में आवारा सांड और कुत्तों का.. <<     NEWS : सेंती में चातुर्मासिक प्रवचन श्रृंखला का.. <<     NEWS : चित्तौड़गढ़ कलक्ट्रेट में दिव्यांगजनों के.. <<     BIG NEWS : मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ चित्तौड़गढ़.. <<     NEWS : जनसुनवाई में जिला कलक्टर ने सुनी आमजन की.. <<     NEWS : जिला कलक्टर ने विद्यार्थियों को दिए सफलता.. <<     NEWS : मेवाड़ के लिए सांसद सी.पी. जोशी की बड़ी पहल,.. <<     KHABAR : मुलठान में किसानों-कांग्रेस ने मिलकर.. <<     NEWS : कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग जिला.. <<    
वॉइस ऑफ़ एमपी न्यूज़ चैनल में विज्ञापन के लिए..
May 1, 2026, 1:15 pm
NEWS : माउंट आबू में आदिवासी महाकुंभ, नक्की झील पर उमड़ा जनसैलाब, 50 हजार से अधिक श्रद्धालु जुटे, पढे़ खबर 

Share On:-

माउंट आबू। आदिवासी समाज का विशाल महाकुंभ शुरू हो गया है, जिसमें 50 हजार से अधिक आदिवासी महिला, पुरुष, युवा और बच्चे पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। यह आयोजन आदिवासी संस्कृति, परंपरा और आस्था का अनूठा संगम बन गया है।


इस अवसर पर राजस्थान की प्रमुख आदिवासी पार्टी भारतीय आदिवासी पार्टी के सांसद राजकुमार रोत भी मेले में पहुंचे और विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लिया। उनका आदिवासी समाज द्वारा भव्य स्वागत किया गया।


आदिवासी समाज के लिए नक्की झील विशेष धार्मिक महत्व रखती है। इसे गंगा और पुष्कर के समान पवित्र माना जाता है। परंपरा के अनुसार, गरासिया समाज के लोग सालभर में दिवंगत परिजनों के नाखून और अस्थियां अपने पास सुरक्षित रखते हैं और पिपली पूनम के अवसर पर ढोल-नगाड़ों के साथ माउंट आबू पहुंचकर पितृ तर्पण करते हैं।


सदियों पुरानी इस परंपरा के तहत हर वर्ष लाखों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग यहां एकत्रित होते हैं। रंग-बिरंगी वेशभूषा, लोकगीत, नृत्य और पारंपरिक अनुष्ठानों के बीच यह मेला आदिवासी संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत करता है।


सांसद राजकुमार रोत ने इस अवसर पर आदिवासी संस्कृति को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने और उसके संरक्षण के लिए सभी से एकजुट होकर प्रयास करने का आह्वान किया।


यह आयोजन न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत और एकता का भी प्रतीक बनकर उभरता है।

VOICE OF MP
एडिटर की चुनी हुई ख़बरें आपके लिए
SUBSCRIBE