माउंट आबू। आदिवासी समाज का विशाल महाकुंभ शुरू हो गया है, जिसमें 50 हजार से अधिक आदिवासी महिला, पुरुष, युवा और बच्चे पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। यह आयोजन आदिवासी संस्कृति, परंपरा और आस्था का अनूठा संगम बन गया है।
इस अवसर पर राजस्थान की प्रमुख आदिवासी पार्टी भारतीय आदिवासी पार्टी के सांसद राजकुमार रोत भी मेले में पहुंचे और विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लिया। उनका आदिवासी समाज द्वारा भव्य स्वागत किया गया।
आदिवासी समाज के लिए नक्की झील विशेष धार्मिक महत्व रखती है। इसे गंगा और पुष्कर के समान पवित्र माना जाता है। परंपरा के अनुसार, गरासिया समाज के लोग सालभर में दिवंगत परिजनों के नाखून और अस्थियां अपने पास सुरक्षित रखते हैं और पिपली पूनम के अवसर पर ढोल-नगाड़ों के साथ माउंट आबू पहुंचकर पितृ तर्पण करते हैं।
सदियों पुरानी इस परंपरा के तहत हर वर्ष लाखों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग यहां एकत्रित होते हैं। रंग-बिरंगी वेशभूषा, लोकगीत, नृत्य और पारंपरिक अनुष्ठानों के बीच यह मेला आदिवासी संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत करता है।
सांसद राजकुमार रोत ने इस अवसर पर आदिवासी संस्कृति को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने और उसके संरक्षण के लिए सभी से एकजुट होकर प्रयास करने का आह्वान किया।
यह आयोजन न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत और एकता का भी प्रतीक बनकर उभरता है।