चित्तौड़गढ़। सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ में 29 अप्रैल, 2026 को शुरू हुआ प्रतिष्ठित अखिल भारतीय सैनिक स्कूल हॉकी टूर्नामेंट 2026 (ग्रुप ‘सी’) शुक्रवार को धूमधाम और जश्न के बीच संपन्न हो गया। समापन समारोह के मुख्य अतिथि कर्नल अनिल देव सिंह जसरोटिया थे। स्कूल की उप प्राचार्य लेफ्टिनेंट कर्नल पारुल श्रीवास्तव, प्रशासनिक अधिकारी मेजर सी श्रीकुमार, स्कूल के सीनियर मास्टर ओंकार सिंह एवं प्रतियोगिता के संयोजक विकास चौबे ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया। समारोह स्कूल के हॉकी ग्राउंड में हुआ जहां मुख्य अतिथि ने आधिकारिक तौर पर मीट के समापन की घोषणा की।
स्कूल के जनसंपर्क अधिकारी बाबूलाल शिवरान ने बताया कि इस ग्रुप स्तरीय प्रतियोगिता में पांच सैनिक स्कूलों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली, जिसमें मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और राजस्थान के प्रतिभागी शामिल थे। तीन दिवसीय प्रतियोगिता का समापन मुख्य अतिथि द्वारा विजयी टीमों और व्यक्तिगत खिलाड़ियों को पदक और ट्रॉफी प्रदान करने के साथ हुआ। पूरी चौंपियनशिप में कड़ी प्रतिस्पर्धा हुई जिसमें मेजबान सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन की बदौलत अंडर-15 एवं अंडर-17 दोनों वर्गों में ओवरऑल चौंपियन बनकर उभरा।
अंडर-15 वर्ग में सैनिक स्कूल मैनपुरी (उत्तरप्रदेश) उपविजेता रहा। अंडर-17 वर्ग में सैनिक स्कूल अमेठी (उत्तरप्रदेश) उपविजेता रहा। अंडर-15 वर्ग में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का खिताब सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ के कैडेट हर्षित यादव ने जीता। अंडर-17 वर्ग में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का खिताब सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ के कैडेट हितेश महला ने जीता। अंडर-15 वर्ग में सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर का खिताब सैनिक स्कूल मैनपुरी के कैडेट अमोग सिंह ने जीता। अंडर-17 वर्ग में सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर का खिताब सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ के कैडेट मोहित ने जीता।
मुख्य अतिथि ने सभी प्रतिभागियों को उनके समर्पण, खेल भावना और मीट के दौरान प्रदर्शित की गई सौहार्दपूर्ण भावना के लिए बधाई दी। उन्होंने खिलाड़ियों को कहा कि खेल सिर्फ शारीरिक फिटनेस तक सीमित नहीं है, यह मानसिक विकास और सामाजिक मेल-जोल का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है। सैनिक स्कूल केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि यह ऐसे युवाओं की पाठशाला है, जो भविष्य में राष्ट्र की रक्षा के लिए समर्पित होते हैं। खेल के मैदान में पसीना बहाकर आप वही मूल्य सीखते हैं जो जीवन की कठिन परिस्थितियों में आपकी ढाल बनते हैं अनुशासन, संयम, टीम भावना, और नेतृत्व। खेलों का उद्देश्य केवल पदक जीतना नहीं होता। असली जीत तब होती है जब हम हार को भी सम्मानपूर्वक स्वीकार करते हैं और जीत को विनम्रता से। खेल हमें सिखाते हैं कि जीवन में संघर्ष जरूरी है, लेकिन संघर्ष के साथ-साथ ईमानदारी, मेहनत और एकता भी उतनी ही जरूरी है।