उज्जैन। चक्रतीर्थ श्मशान में दो अघोरी बाबा इन दिनों चर्चा का विषय बने हुए हैं। जहां 41 डिग्री तापमान में घर से निकलना मुश्किल हो रहा है, वहीं अघोरी बाबा शरीर पर चिता की राख लगाकर जलते कंडों की धूनी रमाकर दोपहर 12 से 3 बजे तक तंत्र साधना कर रहे हैं।
इस तपती गर्मी में एक अघोरी पूरे समय खड़े रहते हैं, जबकि दूसरे धूनी के पास बैठकर मंत्र जाप करते नजर आते हैं। इन्हें देखने के लिए अब लोगों की भीड़ जुटने लगी है।
खड़ेश्वरी अघोरी बाबा योगी विष्णुनाथ महाराज और सोमेश्वर नाथ महाराज श्मशान में कठिन तप कर रहे हैं। अघोर अखाड़ा और सेनापति काल भैरव गो सेवा संगठन के तत्वावधान में शिप्रा नदी के समीप चक्रतीर्थ श्मशान घाट पर अघोरी बाबा की दुर्लभ और कठोर अष्टधूनी तपस्या 41 डिग्री से अधिक तापमान में जारी है।
29 अप्रैल से शुरू हुई यह साधना 21 दिन तक चलेगी, जिसका समापन 19 मई को होगा। योगी विष्णुनाथ महाराज ने बताया कि वे रोजाना 21 कंडे जलाकर आठ धूनी लगाते हैं और मृत आत्माओं की शांति व विश्व कल्याण के लिए हर वर्ष इस तरह का तप करते हैं।
तपोस्थली पर चल रहे इस अनूठे आयोजन को देखने के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। भीषण गर्मी के बीच हो रही इस कठोर साधना में देश-विदेश से साधु-संत, महंत और श्रद्धालुओं का आगमन लगातार जारी है।
ढाई वर्षों से खड़े रहकर कर रहे कठोर तप
योगी विष्णु नाथ महाराज ने 12 वर्षों तक खड़े रहने का संकल्प लिया है। वर्तमान में वे करीब ढाई वर्षों से लगातार खड़े हैं और आगामी वर्षों तक इसी अवस्था में अखंड अघोर तपस्या में लीन रहेंगे। वे अपने नित्य कर्म भी खड़े रहकर ही करते हैं और पूजन-पाठ व साधना भी इसी अवस्था में जारी रखते हैं।
अष्टधूनी तपस्या पंचतत्व अग्नि, जल, पृथ्वी, वायु और आकाश को साक्षी मानकर की जा रही है। इसका उद्देश्य शरीर और मन को साधना, आत्म-साक्षात्कार प्राप्त करना तथा तांत्रिक सिद्धियों की प्राप्ति माना जाता है।