चित्तौड़गढ़। पाराशर समाज का सामूहिक विवाह सम्मेलन शुक्रवार को बाड़ी माताजी मंदिर प्रांगण में हर्षाेल्लास, भक्ति और सामाजिक एकता के वातावरण में सम्पन्न हुआ। समाज के आर्थिक सहयोग से आयोजित इस भव्य आयोजन में 18 जोड़ों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सात फेरे लेकर दांपत्य जीवन की शुरुआत की।
वैदिक रीति से सम्पन्न हुए विवाह संस्कार-
पंडित विष्णु शास्त्री के सानिध्य में सभी विवाह वैदिक रीति-रिवाजों के साथ सम्पन्न कराए गए। इस अवसर पर पारंपरिक तुलसी-शालिग्राम विवाह भी विधिवत सम्पन्न हुआ, जिससे आयोजन का धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया।
भव्य शोभायात्रा से हुई शुरुआत-
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 7.15 बजे निकासी शोभायात्रा के साथ हुई, जो पूरे नगर में उत्साहपूर्वक निकाली गई। इसके बाद 11.15 बजे तोरण एवं वरमाला कार्यक्रम सम्पन्न हुआ तथा 12.15 बजे पाणिग्रहण संस्कार कराया गया, जिसमें सभी 18 जोड़ों ने एक-दूसरे का साथ निभाने का संकल्प लिया।
आशीर्वाद और सम्मान समारोह आयोजित-
दोपहर 2 बजे सामाजिक सम्मेलन एवं अतिथि सत्कार कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें भामाशाहों एवं दानदाताओं का सम्मान किया गया। इसके बाद 3 बजे आशीर्वाद समारोह में समाज के वरिष्ठजनों ने नवविवाहित जोड़ों को सुखमय जीवन का आशीर्वाद दिया।
भावुक माहौल में विदाई रस्म सम्पन्न-
कार्यक्रम के अंत में नवदम्पत्तियों की विदाई रस्म भावुक माहौल में सम्पन्न हुई। भीषण गर्मी को देखते हुए आगूचा निवासी दुर्गाशंकर पाराशर के पुत्रों द्वारा छाछ के टैंकर की विशेष व्यवस्था की गई, जिससे उपस्थित लोगों ने राहत महसूस की। यह पहल आयोजन में सराहनीय रही।
समाजजनों ने दिया आर्थिक सहयोग-
हथलेवा के दौरान समाजजनों ने उत्साहपूर्वक दान-पुण्य किया। मेवाड़ पाराशर समाज द्वारा 31,000 का सहयोग प्रदान किया गया, जिसका विशेष सम्मान किया गया। सम्मेलन में महावीर लाल सनवाड, सत्यनारायण कुरज, जमनालाल निंबाहेड़ा, मुकेश कपासन, गोविंद कुमार, सुनील पाराशर, नारेला, नाना लाल बेगू, गोपाल रेलमंगरा, दिनेश सिंहपुर, नरेन्द्र सूरत, लोकेश सहित अनेक समाजजन उपस्थित रहे।