रतलाम जिले के नामली में गुरुवार रात फोरलेन पर हुए हादसे में घायल 50 वर्षीय मुकेश कुमावत की इंदौर में इलाज के दौरान मौत के बाद ग्रामीणों का प्रदर्शन 12 घंटे बाद खत्म हो गया, जब MPRDC के सहायक महाप्रबंधक ने लिखित आश्वासन दिया, जिसके बाद परिजन शव लेकर रवाना हुए। नामली में फोरलेन हादसे के बाद ग्रामीणों का गुस्सा लगातार बना रहा और वे रात से लेकर सुबह तक धरने पर बैठे रहे। करीब 12 घंटे तक चले इस प्रदर्शन के बाद आखिरकार प्रशासन और कंपनी के आश्वासन पर धरना समाप्त हुआ। लिखित आश्वासन के बाद माने ग्रामीण , हंगामा बढ़ता देख ग्रामीणों ने MPRDC के सहायक महाप्रबंधक अमित भूरिया से लिखित में आश्वासन लिया। इसमें मांगों पर कार्रवाई का भरोसा दिया गया। इसके बाद ही ग्रामीण धरना खत्म करने के लिए तैयार हुए। ग्रामीणों ने सड़क सुरक्षा और सुधार को लेकर 12 बिंदुओं का मांग पत्र भी सौंपा है। इसमें फोरलेन पर सुरक्षा व्यवस्था, लाइट, क्रॉसिंग और अन्य जरूरी सुविधाओं को दुरुस्त करने की मांग शामिल है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर 12 दिन के भीतर सुधार नहीं हुआ और मृतक परिवार को मुआवजा नहीं मिला, तो सड़क पर ही 13वीं का कार्यक्रम किया जाएगा और फिर से बड़ा आंदोलन होगा। ग्रामीणों ने मृतक परिवार को एक करोड़ रुपए मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग रखी है। उन्होंने कहा कि मांग पूरी नहीं होने पर टोल कंपनी का घेराव किया जाएगा। MPRDC के सहायक महाप्रबंधक अमित भूरिया ने कहा कि ग्रामीणों द्वारा जो भी मांगें रखी गई हैं, उन्हें नियमों के अनुसार जो संभव होगा, वह किया जाएगा। गुरुवार रात करीब 9 बजे मुकेश कुमावत अपने अंकल मांगीलाल कुमावत के साथ स्कूटी से पल्टूना फंटे के पास फोरलेन पार कर रहे थे। उसी दौरान रतलाम की ओर से आ रही काले रंग की कार, जिस पर 'मप्र पुलिस' लिखा था, ने तीनों को टक्कर मार दी। एएसआई की कार निकली, नोटिस देकर छोड़ा, हादसे के बाद कार चालक मौके से फरार हो गया था, लेकिन बाद में नामली थाने पहुंच गया। जांच में कार धार जिले के धामनोद थाने में पदस्थ एएसआई दुर्गा प्रसाद वैष्णव की निकली, जो खुद कार चला रहे थे। पुलिस ने उन्हें नोटिस देकर छोड़ दिया और कार जब्त कर ली। जिस जगह हादसा हुआ, वहां फोरलेन के बीच लगे सीसीटीवी कैमरे लंबे समय से बंद पड़े हैं। सड़क पार करने के दौरान लाइट की भी कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे अंधेरा रहता है और हादसे का खतरा बना रहता है। धरने के दौरान प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मौके पर मौजूद रहे और लगातार ग्रामीणों को समझाने की कोशिश करते रहे। अंततः लिखित आश्वासन के बाद मामला शांत हुआ और धरना समाप्त कर दिया गया।