नीमच। श्री भोलेनाथ सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा का समापन पूर्णाहुति एवं महाप्रसादी के साथ श्रद्धा और भक्ति भाव से संपन्न हुआ। इस अवसर पर मंच से श्रद्धालुओं को भोजन के सदुपयोग एवं महत्व का संदेश देते हुए कहा गया- “उतना ही लें थाली में, कि बहाना न पड़े नाली में।” बताया गया कि जब भोजन को भगवान को भोग लगाकर प्रसाद रूप में ग्रहण किया जाता है, तब उसके कण-कण में ईश्वर का वास होता है।
हवन-यज्ञ से गूंजा क्षेत्र
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 7 बजे हवन-यज्ञ के साथ हुई। वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा। यज्ञ के पश्चात सुबह 9 बजे पूर्णाहुति हुई, जिसमें मुख्य यजमानों ने जोड़े सहित भाग लिया। इसके बाद महाआरती का आयोजन किया गया। श्रद्धालु अपने घरों से दीपक एवं थाली लेकर पहुंचे और समिति सदस्यों के मार्गदर्शन में आरती में शामिल हुए।
महाप्रसादी में उमड़ी भीड़
“शिव नमो पार्वती पतिए, हर-हर महादेव” के जयघोष के साथ सुबह लगभग 10रू30 बजे महाप्रसादी प्रारंभ हुई। गर्मी को देखते हुए पूरे क्षेत्र में टेंट की व्यवस्था की गई थी। पुरुष एवं मातृशक्ति के लिए अलग-अलग काउंटर बनाए गए थे, जहां स्वयंसेवकों द्वारा व्यवस्थित रूप से श्रद्धालुओं को प्रवेश कराया जा रहा था।
पर्यावरण संरक्षण का भी रखा ध्यान
भोजन प्रसादी में किसी भी प्रकार की प्लास्टिक डिस्पोजल सामग्री का उपयोग नहीं किया गया। समिति ने पानी की पर्याप्त व्यवस्था की तथा जल की बर्बादी रोकने पर विशेष ध्यान दिया। लगभग 2100 से अधिक शिवभक्तों ने प्रसादी ग्रहण की। श्रद्धालु दोपहर करीब 2रू30 बजे तक भोजन प्रसादी ग्रहण करते रहे।
कथाव्यास परिवार का सम्मान
इस अवसर पर भोलेनाथ सेवा समिति द्वारा कथाव्यास पं. राजेंद्र जी पुरोहित एवं ओम जी शर्मा का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में समाजसेवी संतोष जी चोपड़ा, मुकेश जी पोरवाल सहित कई अतिथियों एवं विभिन्न समितियों ने सहभागिता की।
पोथी यात्रा में झूमे श्रद्धालु
कथा पंडाल में विराजित भगवान लड्डू गोपाल एवं पोथी यात्रा का भी आयोजन किया गया। यात्रा के दौरान श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए नाचते-गाते नजर आए। समिति सदस्यों ने पूरे आयोजन को सुव्यवस्थित एवं सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उक्त जानकारी अरुण श्रीवास्तव एवं मिहुल धाकड़ द्वारा संयुक्त रूप से दी गई।