नीमच। महिला स्वयं सहायता समूह संगठन मध्यप्रदेश से जुड़े समूह संचालकों एवं महिला रसोइयों की समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में आंगनवाड़ी, पूरक पोषण आहार और मध्यान्ह भोजन योजना का संचालन करने वाली महिला समूह संचालकों एवं रसोइयों की विभिन्न समस्याओं के निराकरण और समयबद्ध भुगतान की मांग की गई।
संगठन के अनुसार, प्रदेश में बड़ी संख्या में महिला स्वयं सहायता समूह संचालक एवं महिला रसोइयां बच्चों, गर्भवती एवं धात्री माताओं के पोषण तथा शासकीय विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन व्यवस्था का कार्य कर रही हैं। संगठन का कहना है कि सीमित मानदेय, बढ़ती लागत और भुगतान में देरी के कारण महिलाओं को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
समय पर भुगतान और मानदेय बढ़ाने की मांग
ज्ञापन में मांग की गई कि मध्यान्ह भोजन एवं आंगनवाड़ी योजना की राशि प्रत्येक माह निश्चित तिथि पर संबंधित समूहों के खातों में जारी की जाए तथा लंबित भुगतान तत्काल किया जाए। पूरक पोषण आहार संचालित करने वाले समूहों को निर्धारित राशि समय पर उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई।
महिला रसोइयों का मानदेय बढ़ाने, 10 माह के बजाय 12 माह का भुगतान करने और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की गई। साथ ही लंबे समय से कार्यरत अनुभवी रसोइयों को केवल बच्चों की संख्या कम होने के आधार पर कार्य से नहीं हटाने की मांग की गई।
पोषण आहार की राशि और सुविधाएं बढ़ाने की मांग-
संगठन ने 6 माह से 3 वर्ष तक के बच्चों तथा गर्भवती एवं धात्री माताओं के पूरक पोषण आहार की लागत एवं खाद्यान्न मात्रा में वृद्धि की मांग की। आंगनवाड़ी के लिए ईंधन एवं परिवहन की पर्याप्त राशि उपलब्ध कराने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।
इसके अलावा स्कूल एवं आंगनवाड़ी में कार्यरत महिला रसोइयों के लिए ड्रेस कोड लागू कर प्रति रसोइया 1,000 रुपए वार्षिक ड्रेस राशि देने, मध्यान्ह भोजन के बाद बच्चों की जूठी थालियां साफ करने के लिए अतिरिक्त रसोइया/सहायिका या अतिरिक्त मानदेय देने तथा स्कूलों में गैस की उपलब्धता और बुकिंग प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग की गई।
कागजी प्रक्रिया सरल करने की मांग-
ज्ञापन में समूहों को अनावश्यक कागजी कार्रवाई से राहत देने, अनुबंध नवीनीकरण की प्रक्रिया सरल करने तथा नवीनीकरण अवधि 5 वर्ष करने की मांग की गई। ऋण लेने के इच्छुक सदस्यों के लिए स्वैच्छिक आवेदन की सुविधा और ई-केवाईसी अथवा पोर्टल संबंधी प्रक्रिया में अनावश्यक परेशानी नहीं होने देने की मांग भी रखी गई।
संगठन ने यह भी मांग की कि लंबित भुगतान एवं मांगों को लेकर आवाज उठाने वाली महिलाओं को अनुबंध समाप्त करने अथवा किसी अन्य को काम देने की धमकी संबंधी शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं।
पूर्व में दिए ज्ञापनों पर कार्रवाई की मांग-
संगठन ने बताया कि पूर्व में भी मुख्यमंत्री, संबंधित विभागीय मंत्री और जिला प्रशासन को ज्ञापन एवं जनसुनवाई के माध्यम से समस्याओं से अवगत कराया जा चुका है। संगठन का कहना है कि कई ज्ञापन संबंधित विभाग तक नहीं पहुंचने अथवा जिला स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने की जानकारी सामने आई है।
ज्ञापन में प्रत्येक आवेदन को संबंधित विभाग तक भेजने, उसकी प्राप्ति सुनिश्चित करने तथा कार्रवाई की स्थिति संगठन को उपलब्ध कराने की व्यवस्था की मांग की गई। संगठन ने कहा कि उसका उद्देश्य शासन की योजनाओं को मजबूत करना और योजनाओं का संचालन करने वाली महिलाओं को समय पर भुगतान एवं सम्मानजनक कार्य परिस्थितियां उपलब्ध कराना है।