चित्तौड़गढ़। गंभीरी नदी तट स्थित खरडेश्वर महादेव मंदिर में चातुर्मास व्रत अनुष्ठान के अंतर्गत आयोजित शिव महापुराण कथा में अयोध्या के संत आशीष कुमार बापू ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि शिव पुराण का श्रद्धापूर्वक श्रवण करने मात्र से प्राणी के पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष का मार्ग प्राप्त होता है।
कथा के दौरान संत आशीष बापू ने ब्राह्मण देवराज और उनकी पत्नी चंचुला की कथा का वर्णन करते हुए बताया कि देवराज वेदों से विमुख होकर दुष्कर्मों में लिप्त था। एक यात्रा के दौरान वह एक शिव मंदिर में ठहरा, जहां शिव महापुराण की कथा चल रही थी। अस्वस्थ होने के बावजूद उसने कथा का श्रवण किया और एक माह बाद उसकी मृत्यु हो गई। उन्होंने बताया कि कथा श्रवण के प्रभाव से भगवान शिव के गण उसे शिवलोक ले गए।
उन्होंने आगे कहा कि पति की मृत्यु के बाद चंचुला भी गोकर्ण क्षेत्र पहुंची और संतों के सान्निध्य में शिव महापुराण का श्रवण किया। कथा के प्रभाव से उसके मन में वैराग्य और ज्ञान का उदय हुआ तथा अंत में वह भी शिवधाम को प्राप्त होकर माता पार्वती की सखी बनी।
संत आशीष बापू ने कहा कि गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी नियमित रूप से भगवान की कथा सुनना, कीर्तन करना और उसका मनन करना चाहिए। शिव पुराण का श्रवण परिवार में सुख, शांति और समृद्धि लाता है तथा मनुष्य को जीवन के दुखों और कष्टों से मुक्ति दिलाता है।
उन्होंने विद्येश्वर संहिता का उल्लेख करते हुए कहा कि आध्यात्मिक साधना का प्रारंभ भले ही कठिन प्रतीत हो, लेकिन निरंतर अभ्यास से वही जीवन में मंगल और परमानंद का कारण बनती है। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।