चित्तौड़गढ़। 21वीं सदी के राजस्थान साहित्यिक आंदोलन के तत्वावधान में मासिक साहित्यिक संवाद 'सृजन रविवार' का आयोजन ऋतुराज वाटिका सभागार में हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार शिव मृदुल तथा अध्यक्षता आंदोलन के संस्थापक अनिल सक्सेना 'ललकार' ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ हुआ।
इस बार कार्यक्रम का विषय 'मेरी प्रिय पुस्तक : मेरी प्रेरणा' रहा। विषय प्रवर्तन करते हुए डॉ. रमेश मयंक ने कहा कि श्रेष्ठ पुस्तकें केवल ज्ञान का स्रोत नहीं, बल्कि व्यक्तित्व, संस्कार और चिंतन के निर्माण की आधारशिला होती हैं।
अध्यक्षीय उद्बोधन में अनिल सक्सेना 'ललकार' ने कहा कि 'सृजन रविवार' का उद्देश्य युवाओं और बच्चों में पठन-पाठन की संस्कृति विकसित करना तथा उन्हें साहित्य, संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मंच साहित्यकारों, कलाकारों, चिंतकों और रचनाकारों का है तथा इसका किसी भी राजनीतिक दल या गतिविधि से कोई संबंध नहीं है।
मुख्य अतिथि शिव मृदुल ने कहा कि पढ़ने की संस्कृति को पुनर्जीवित किए बिना समाज का बौद्धिक और सांस्कृतिक विकास संभव नहीं है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण के लिए श्रेष्ठ पुस्तकों के नियमित अध्ययन पर जोर दिया।
कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने अपनी प्रिय पुस्तकों का परिचय, पुस्तक समीक्षा, कविता, लघुकथा, संस्मरण एवं साहित्यिक विचार प्रस्तुत किए। अब्दुल सत्तार, डॉ. रमेश मयंक, नवीन शर्मा, डॉ. कनक जैन, डॉ. माणिक, डॉ. मनीषा दाधीच, अनिक्षित श्रीवास्तव, जीतेश श्रीवास्तव, उषा सोमानी एवं लक्ष्मीनारायण भारद्वाज सहित वक्ताओं ने पठन-पाठन, साहित्य, संस्कार और भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने प्रत्येक माह कम से कम एक श्रेष्ठ पुस्तक पढ़ने, साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा देने, नवोदित रचनाकारों का उत्साहवर्धन करने तथा समाज में पठन-पाठन की संस्कृति को मजबूत बनाने का सामूहिक संकल्प लिया। साथ ही आगामी 'सृजन रविवार' में विषय आधारित कविता-लेखन एवं कविता-पाठ आयोजित करने की घोषणा की गई।
इस अवसर पर शिव मृदुल, डॉ. रमेश मयंक, अखिलेश श्रीवास्तव, लक्ष्मीनारायण भारद्वाज, डॉ. माणिक, डॉ. मनीषा दाधीच, डॉ. कनक जैन, नवीन शर्मा, सुनील कुमार बाटू, सुरेंद्र जोशी, अजय त्रिपाठी, शिवशंकर व्यास, उपेंद्र 'अणु', जीतेश श्रीवास्तव, अनिक्षित श्रीवास्तव, कृष्णा कुमारी वैष्णव, उषा सोमानी, वंदना जोशी, कृष्णा सिन्हा, अब्दुल सत्तार सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, रचनाकार एवं साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।