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August 12, 2026, 6:42 pm
BIG NEWS : आगामी अफीम नीति 2026-27 को लेकर दिल्ली में मंथन, काश्तकारों की आवाज बने नीमच-मंदसौर संसदीय क्षेत्र के सांसद गुप्ता, सीपीएस किसानों की हो सकती है बल्ले-बल्ले, पढ़े खबर

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मंदसौर। वर्ष 2026-27 की अफीम खेती नीति को लेकर वित्त मंत्रालय में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी की अध्यक्षता में सांसदों एवं प्रमुख हितधारकों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में अफीम उत्पादक किसानों के हितों के संरक्षण, गुणवत्ता में सुधार तथा नीति एवं लाइसेंस प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में मंदसौर-नीमच-जावरा संसदीय क्षेत्र के सांसद सुधीर गुप्ता सहित अन्य सांसद एवं संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से रखा-
सांसद सुधीर गुप्ता ने केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री के समक्ष मंदसौर, नीमच एवं जावरा क्षेत्र के अफीम किसानों की विभिन्न समस्याओं और मांगों को प्रमुखता से रखा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसान वैध एवं लाइसेंस प्राप्त अफीम खेती से जुड़े हैं। यह खेती श्रमसाध्य होने के साथ मौसम, ओलावृष्टि, अतिवृष्टि, फसल चोरी एवं जंगली पशुओं से होने वाले नुकसान जैसी परिस्थितियों से प्रभावित होती है।

पांच वर्ष के औसत को मिले आधार-
सांसद गुप्ता ने आगामी नीति में मॉर्फीन का औसत मानक 3.5 प्रतिशत रखने तथा लाइसेंस पात्रता के लिए केवल एक वर्ष की उपज या मॉर्फीन को आधार नहीं मानते हुए पिछले पांच वर्षों के औसत प्रदर्शन को आधार बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों तथा पूर्व में लाइसेंस गंवाने या पात्र होने के बावजूद लाइसेंस से वंचित किसानों को विशेष राहत देकर पुनः लाइसेंस प्रक्रिया से जोड़ने की मांग की।

सभी पात्र किसानों को समान लाइसेंस देने की मांग-
उन्होंने सभी पात्र किसानों को न्यूनतम 10 आरी का समान लाइसेंस देने, एक से अधिक प्लॉट में खेती की अनुमति देने तथा सीपीएस पद्धति के किसानों को पांच वर्ष के औसत प्रदर्शन के आधार पर चीरा/लांसिंग पद्धति में शामिल करने का सुझाव दिया। वर्ष 2025-26 में बेहतर पोस्ता भूसा उत्पादन करने वाले सीपीएस किसानों को भी चीरा पद्धति में शामिल करने तथा लांसिंग का निर्धारित रकबा अनावश्यक रूप से कम नहीं करने की मांग रखी।

मॉर्फीन जांच में पारदर्शिता पर जोर-
सांसद ने गुणवत्ता एवं मॉर्फीन जांच में पारदर्शिता की मांग की। उन्होंने 6 प्रतिशत से अधिक मॉर्फीन के आधार पर पूर्व में निरस्त मामलों की पुनः समीक्षा, किसान के असंतुष्ट होने पर नमूने की दोबारा जांच का अधिकार तथा पुराने लाइसेंस एवं वैध दस्तावेजों के आधार पर पात्र किसानों को लाइसेंस देने का सुझाव दिया। उन्होंने फसल चोरी एवं प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों के लाइसेंस निरस्त नहीं करने तथा वास्तविक नुकसान के अनुरूप मुआवजा और बीमा का लाभ देने की मांग भी रखी।

पुराने मामलों के समाधान की मांग-
सांसद गुप्ता ने दोषमुक्त NDPS प्रकरणों वाले किसानों को पुनः लाइसेंस प्रक्रिया में शामिल करने, पुराने लाइसेंस एवं उत्तराधिकार संबंधी मामलों के सरल समाधान तथा भूमि या निवास परिवर्तन की स्थिति में लाइसेंस स्थानांतरण की प्रक्रिया आसान बनाने की बात कही। साथ ही मुखिया चयन में रोटेशन प्रणाली, पारदर्शिता एवं व्यापक किसान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का सुझाव दिया।

अफीम उत्पादों के उचित मूल्य की मांग-
उन्होंने अफीम गोंद एवं सीपीएस डोडाचूरा/पोस्ता भूसा के भाव बढ़ाने तथा उच्च गुणवत्ता वाली अफीम उत्पादित करने वाले किसानों को प्रोत्साहन देने की मांग की। बढ़ती कृषि लागत को देखते हुए किसानों को उचित मूल्य दिलाने पर भी जोर दिया गया।

नीति समय पर जारी करने का सुझाव-
सांसद ने आगामी अफीम नीति को सितंबर के दूसरे सप्ताह में घोषित करने तथा लाइसेंस वितरण एवं तौल की तारीख कम से कम 15 दिन पूर्व ऑनलाइन जारी करने का सुझाव दिया। उन्होंने लाइसेंस एवं तौल प्रक्रिया को अधिक डिजिटल एवं पारदर्शी बनाने तथा किसानों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों अथवा मुखिया के पास बुलाने के बजाय मोबाइल संदेश या घर पर सूचना देने की व्यवस्था करने की मांग की।

किसान हित में समिति बनाने का सुझाव-
सांसद गुप्ता ने बिना अनुमति पोस्ता आयात पर प्रभावी कार्रवाई, NDPS Act से जुड़े किसान हित के प्रावधानों की समीक्षा तथा किसानों से संबंधित मामलों के लिए विशेष समिति गठित करने का सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि अफीम नीति 2026-27 किसान हितैषी, पारदर्शी एवं व्यावहारिक होनी चाहिए, ताकि प्राकृतिक आपदाओं या पुराने मामलों से प्रभावित पात्र किसानों को न्याय मिल सके और अफीम खेती से जुड़े किसानों की समस्याओं का स्थायी समाधान किया जा सके। बैठक में किसानों की समृद्धि, पारदर्शी व्यवस्था, अफीम की गुणवत्ता में सुधार तथा नीति प्रक्रिया को सरल बनाने से जुड़े विभिन्न सुझावों पर सकारात्मक विचार-विमर्श किया गया।

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