दतिया। देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर करने वाले शहीद सिपाही पातीराम को सम्मान दिलाने की मांग आज भी अधूरी है। दतिया जिले की भांडेर तहसील के ग्राम बागपुरा में शहीद की प्रतिमा स्थापित करने और उनके नाम से प्रवेश द्वार बनवाने के लिए परिवार वर्षों से प्रयास कर रहा है। अब इस मांग को पूरा करने की उम्मीद कलेक्टर की अनुमति पर टिकी है।
शहीद सिपाही पातीराम वर्ष 1992 में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) में पदस्थ थे। आतंकवादियों से मुठभेड़ के दौरान उन्होंने देश की रक्षा करते हुए सर्वाेच्च बलिदान दिया था। उनकी शहादत को सम्मान देने के उद्देश्य से गांव में उनकी प्रतिमा स्थापित करने और स्मारक प्रवेश द्वार बनवाने की मांग की जा रही है।
शहीद की पत्नी बिट्टी देवी पातीराम ने इस संबंध में कलेक्टर से अनुमति मांगी है। परिजनों का कहना है कि संबंधित विभागों से आवश्यक अनुमतियां मिल चुकी हैं, लेकिन कलेक्ट्रेट कार्यालय से अंतिम अनुमति का इंतजार है।
ऐसे में सवाल उठता है कि देश के लिए सर्वाेच्च बलिदान देने वाले शहीद को सम्मान दिलाने की यह मांग आखिर कब पूरी होगी? क्या प्रशासन जल्द अनुमति देकर शहीद की स्मृति को स्थायी सम्मान देने का रास्ता साफ करेगा, या परिवार को अभी और इंतजार करना पड़ेगा?