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December 17, 2022, 2:35 pm
NEWS : पारस मुनि मसा ने कहा- मानव का अपने जीवन में अशुभ प्रवृत्तियों का त्याग करना या उनको छोड़ना तप कहलाता है, संसार सागर से पार उतरने के लिए तप सर्वश्रेष्ठ माध्यम, पढ़े रेखा खाबिया की खबर 

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चित्तौड़गढ़। शनिवार को चित्तौड़गढ़ के मीरा नगरी स्थित जैन स्थानक में जिज्ञासुओं को संबोधित करते हुए शांतक्रांति संघ के प्रखर वक्ता कृपानिधि स्वामिनाथ साधु श्रेष्ठ श्री पारस मुनि म सा ने कहा कि मानव का अपने जीवन में अशुभ प्रवृत्तियों का त्याग करना या उनको छोड़ना तप कहलाता है। दूसरे शब्दों में जिस प्रवृत्ति से हमारी आत्मा शुद्ध, पवित्र और पावन बने वो तप की श्रेणी के अंतर्गत आता है। तप के द्वारा कर्मों की निर्जरा होती है। तप कारण है और निर्जरा कार्य है। इन दोनों का अभेद संबंध मान कर दोनों को एक भी माना गया है। भाव तप के दूसरे प्रकार संसार व्युत्सर्ग तप के विषय में बताते हुए मुनि श्री ने आगे कहा कि वैसे तो संसार को कोई छोड़ नहीं सकता है। जहां जीव और अजीव विद्यमान रहते हैं वो संसार है। अनंत सिद्ध भी इसी संसार में लोक के अग्र भाग में अव्याबाध सुखों के साथ विराजमान होकर वे भी इसी संसार में रहे हुए हैं इसलिये इस संसार से अलग हो पाना संभव नहीं है परन्तु संसार वृद्धि के साधनों एवम् जन्म मरण के कारणों का परित्याग करना संसार व्युत्सर्ग तप कहलाता है। ज्ञानियों के अनुसार जो जीव मृत्यु को प्राप्त होता है उसका पुनः जन्म निश्चित है परन्तु जो संसार व्युत्सर्ग तप के द्वारा संसार वृद्धि के कारणों को समाप्त कर देता है वो अपनी मृत्यु को निर्वाण महोत्सव का रुप देकर अपनी आत्मा के अन्तिम लक्ष्य मुक्ति को प्राप्त कर जन्म मरण के चक्कर से आज़ाद हो जाता है। भाव तप के तीसरे प्रकार कर्म व्युत्सर्ग्तप के विषय में बताते हुए मुनि श्री ने कहा कि आत्मा के साथ लगे हुए  8 कर्मों का पुरूषार्थ के द्वारा परित्याग करना कर्म व्युत्सर्ग्ग कहलाता है। इन 8 कर्मों का परित्याग हम तभी कर पाएंगे जब मन, वचन, काया के योगों पर नियंत्रण करेंगे। कर्मों को त्यागने का साधन योग है। हम मन, वचन काया की दूषित प्रवृत्तियों का परित्याग कर अपनी आत्मा को हल्की बना कर आत्मिक भावों की उच्चता प्राप्त कर सकते हैं । इससे पूर्व सन्त श्री अभिनंदन मुनि ने धर्म सभा को बताया कि  यदि आप अपने जीवन में लाभ प्राप्त करना चाहते हो तो निरन्तर दूसरों का भला करते रहो और भलाई के किसी भी कार्य में कभी अंतराय मत डालो । प्रभू पार्श्वनाथ का जन्मकल्याणक पोषी दशम एवम् साधु श्रेष्ठ पारस मुनि जी का 73 वा पावन जन्मदिवस एक ही दिन है अतः ज्यादा से ज्यादा जप एवम् तप करने का लक्ष्य बनावे। तेला तप करने वाले तपस्वियों की धर्म सभा में खूब खूब अनुमोदना की गई। लादू लाल  डांगी परिवार द्वारा सभी तेला तप के तपस्वियों के पारने की व्यवस्था  19 दिसम्बर 2022 को सुबह मीरा नगरी जैन स्थानक की ऊपरी मंजिल पर की गई है। संचालन संघ मंत्री पारस बाबेल द्वारा किया गया जिन्होंने पारने के लाभार्थी डांगी परिवार का साधुवाद ज्ञापित किया।
 

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