चित्तौड़गढ़। माघ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा पर 22 जनवरी को अभिजित मुहूर्त व सिद्धि योग में गुप्त नवरात्र का आरंभ होगा। श्रीमद् देवी भागवत महापुराण के अनुसार शक्ति पूजन के लिए चार नवरात्र विशेष बताए गए हैं। जिसमें से दो प्रकट व दो गुप्त नवरात्र हैं। चैत्र व अश्विन की नवरात्र को प्राकटय तथा आषाढ़ व माघ मास की नवरात्र को गुप्त नवरात्र कहा जाता है। श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ मृत्युञ्जय तिवारी ने बताया कि गुप्त साधना की सिद्धि के लिए गुप्त नवरात्र विशेष है। देवी आराधना के इस पर्व काल में साधना का विशेष महत्व है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, माघ मास की गुप्त नवरात्रि शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवमी तिथि तक मनाई जाएगी। उसके अनुसार, इस बार ये तिथि 22 जनवरी, रविवार से 30 जनवरी, सोमवार तक रहेगी। इस दौरान तिलकुंद चतुर्थी, बसंत पंचमी, रथ सप्तमी, अचला सप्तमी और भीष्माष्टमी का पर्व भी मनाया जाता है। भारतीय पंचांग के अनुसार, ये विक्रम संवत्सर 2079 की अंतिम नवरात्रि रहेगी। ज्योतिषाचार्य डॉ तिवारी के अनुसार भारतीय ज्योतिष शास्त्र में योगों की संख्या मूल रूप से 27 बताई जाती है। इनमें भी विष्कुम्भ और आनंद आदि योगों की अलग-अलग श्रेणियां विभाजित हैं। विष्कुम्भ योग में आने वाले योगों की संख्या और उनके प्रभाव का भी अलग-अलग महत्व बताया गया है, क्योंकि इस बार 22 जनवरी रविवार के दिन प्रातः वज्र नामक योग रहेगा उसके बाद अभिजित मुहूर्त में सिद्धि नाम का योग आरंभ होगा। कलश स्थापना का मुहूर्त समय मध्यान्ह शुभ अभिजीत में दिन के 12ः00 बजे का बताया जाता है, ज्योतिष शास्त्रीय विवेचन से बात करें तो अभिजीत मुहूर्त के समय सिद्धि योग का संयोग बनेगा इस दौरान कलश स्थापना या व्रत का संकल्प आरंभ करने से कार्य की सिद्धि होती है।
गुप्त साधना के लिए यह नवरात्र विशेष
डॉ तिवारी ने कहा कि वैसे देवी भागवत की मान्यता के आधार पर देखें तो जीवन का हर दिन साधना के लिए नियुक्त किया गया है। फिर भी जो कार्य व्यवसाय अथवा अन्य कारणों से साधना का लाभ नहीं ले पाते हैं उन लोगों के लिए गुप्त नवरात्र का विशेष प्रकल्प शास्त्र में बताया गया है। इस दौरान अपने कार्य में सिद्धि तथा सफलता की प्राप्ति एवं स्वास्थ्य लाभ आदि की प्राप्ति के लिए शास्त्रीय मान्यता का लाभ लिया जा सकता है। नौ दिन की नवरात्र नवरात्र प्राय: नौ दिनों की होती है किंतु पंचांग के गणित के आधार पर तिथि की घट बढ़ होने से एक या दो दिन का अंतर आता है। जिसके कारण नवरात्र में नौ दिन की पूर्णता तीन साल के आसपास बनती है। साधना पूजन के लिए नौ दिन के नवरात्र श्रेष्ठ बताए गए हैं। इस बार गुप्त नवरात्र नौ दिनों के रहेंगे।
गुप्त नवरात्र में यह त्यौहार विशेष गौरी तृतीया
धर्म शास्त्रीय मान्यता के अनुसार गौरी तृतीया के दिन सौभाग्यवती स्त्रियां अपनी पति की दीर्घायु एवं कुंवारी कन्या श्रेष्ठ पति की प्राप्ति के लिए माता गौरी की पूजा करती हैं।
वरद तिल कुंद चतुर्थी व्रत
माघ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी वरद तिल कुंद चतुर्थी के नाम से जानी जाती है। इस दिन गणपति जी पर कुंद के पुष्प चढ़ाने की भी परंपरा है। वसंत पंचमी : वसंत पंचमी विद्या की अधिष्ठात्री देवी माता सरस्वती के प्राकट्य का दिन है। इस को अबूझ मुहूर्त भी कहा गया है।