कामखेड़ा। पवित्र पावन परवन नदी के तट पर जागदेव मंदिर प्रांगण में चल रही सप्त दिवसीय देवनारायण कथा के दौरान देवनारायण भक्त ने कहा कि सभी बगड़ावतों का नाश हो जाने पर साडू माता हीरा दासी सहित मालासेरी की डूंगरी पर निवास करती है। एक दिन अचानक वहां पर नापा ग्वाला आता है और माता को सात बीसी राजकुमारों के भी मारे जाने का समाचार देता है और कहता है कि साडू माता यहां से मालवा अपने पीहर वापस चलो। कहीं राजा राव यहां पर भी चढ़ाई ना कर दे। लेकिन माता जाने से मना कर देती है। जब एक दिन साडू माता की काली घोड़ी के नीला बछैरा पैदा होता है, तब साडू माता को भगवान की कही बात याद आती है कि काली घोड़ी के एक बछैरा होगा वो नीलागर घोड़ा होगा उसके बाद मैं अवतार लूंगा। साडू माता भगवान के कहे अनुसार सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान ध्यान कर भगवान के स्मरण करती है। वहीं मालासर की डूंगरी पर पहाड़ टूट जाए और उसमें से पानी फूटता है, जल की धारा बहती हुई निकलती है। पानी में कमल के फूल खिलते हैं उन्हीं फूलों में से एक फूल में भगवान विष्णु देवनारायण के रूप में अवतरित होते हैं।
माघ शुक्ल सप्तमी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में भगवान देवनारायण मालासेरी की डूंगरी पर अवतार लेते हैं। देवनारायण के बालक रूप को साडू माता अपने गोद में लेती है, उन्हें दूध पिलाती है और उन्हें लाड करती है। वहां से साडू माता हीरा दासी और नापा ग्वाल वालों गोठा आते हैं। गांव में आते ही घर-घर में घी के दिए जलाए जाते हैं और जब सुबह जब गांव भर में बालक के जन्म लेने की खबर होती है, नाई आता है और घर-घर बंधनवाल बांधी जाती है। भगवान के जन्म लेने से घर घर में खुशी छा जाती है। साडू माता ब्राह्मण को बुलाती है और बच्चे का नाम संस्करण किया जाता है।