जावरा। बढ़ते हुए भौतिकवाद के चलते स्वाध्याय से आज आदमी दूर होता जा रहा है। जिसका प्रमुख कारण मोबाइल भी है। किंतु कविता साहित्य की ऐसी विधा है जिनकी लोकप्रियता आज भी विद्यमान है। कविता के प्रति बच्चों से लेकर बूढ़े व्यक्ति का लगाव है। कविता अपने विचारों को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम है। जिसमें कम शब्दों में ज्यादा बात कह सकते हैं इसीलिए कविता के प्रति पुरातन काल से लगाकर वर्तमान तक आम आदमी का लगाव व जागरूकता बनी हुई है।उक्त विचार राष्ट्रीय कवि संगम रतलाम इकाई द्वारा श्रीमाधवानन्द अकैडमी पर आयोजित व्याख्यानमाला में बढ़ते समय में कविता के प्रति जागरूकता विषय पर साहित्यकार राजेंद्र श्रोत्रिय ने मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्त किए।
इस अवसर पर राष्ट्रीय कवि संगम के जिला अध्यक्ष ब्रजराज ब्रज ने कहा कि कविता आत्माओं की सहज सरल अभिव्यक्ति है। जिसे पढ़ना समझना सरल है। कविता इसलिए आज लोकप्रिय है। हमें कविता का नियमित अध्ययन करना चाहिए ताकि हमें नई दिशा और नई विचार प्राप्त हो। इस अवसर पर राजेंद्र श्रोत्रिय की साहित्य साधना एवं मध्य प्रदेश के गुमनाम क्रांतिकारी पुस्तक की उपलब्धि पर शाल श्रीफल से सम्मान किया गया।
कार्यक्रम में हास्य व्यंग के कवि संस्था महासचिव जुझार सिंह भाटी, परामर्शदाता आजाद भारती, ब्रजराज ब्रज ने राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत काव्य पाठ किया। कार्यक्रम का संचालन जुझार सिंह भाटी ने किया, आभार मनीष शर्मा ने व्यक्त किया।