नीमच/पिराना। कुल्हड़ में जाने से पूर्व एक बार जीते जी बस या ट्रेन की सीट पर बैठकर गंगा जी चले जाना, नहीं तो बच्चे निधन लिखवा देगें, समय है धर्म के लिए समय निकाल लेना। धन-धन करते पूरा जीवन निकाल दिया और आखरी में निधन। धन घटा कुछ नहीं घटा, और धर्म घटा सब कुछ घटा, धर्म रूपी धन कभी नहीं घटेगा। शब्दों के हथोड़े मत बनना, जिस पर हथोड़े पड़ते हैं सहनशील रुपी एरण बन जाना। जिस व्यक्ति ने परिस्थितियों से समझौता करना सिख लिया उसके परिवार में हमेशा सुख समृद्धि और शांति बनी रहेगी। आवश्यकता से अधिक धन की लिप्सा का भाव हमारे भीतर अवगुणों का बीजारोपण करता है। धन की प्यास कभी बुझती नही है, बल्कि उसमें अत्यधिक मोह प्रायः अनीति और पतन की ओर ले जाता है यही मार्ग हमें एक भीषण दल दल की ओर घसीटता है। अथाह धन संग्रह की यात्रा यात्री में विकृतियां पैदा कर देती है। इस यात्रा में वह जाने अनजाने अपराधी बन बैठता है। संप्रति पैसे की भूख ने व्यक्ति को जीवन के वास्तविक उद्देश्य से भटका दिया है। गंगा का पानी और गुरु की वाणी दुष्ट व्यक्ति को भी मार्ग दिखा दिखाकर किए गए पाप से मुक्ति दिला देता है। सती और जती की दृष्टि से पृथ्वी टिकी हुई है।
उक्त अमृतवाणी कथा मर्मज्ञ पं भीमाशंकर शास्त्री धारियाखेड़ी वाले ने अपने मुखारविंद से समस्त ग्रामवासियों के सहयोग से आयोजित साप्ताहिक श्रीमद भागवत ज्ञान गंगा प्रवचन के दौरान धर्म पंडाल में उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं को तृतीय दिवस बुधवार को प्राथमिक विद्यालय परिसर में स्थित कथा पंडाल में प्रवाहित करते हुए कही। पंडित भीमाशंकर शास्त्री ने कहा कि तीनों लोकों के त्रिलोकी नाथ भी गुरु के आदी हैं। जिसके जीवन में गुरु नहीं उसका जीवन शुरू भी नहीं। दीपक बिना मंदिर अधूरा उसी तरह गुरु बिना घोर अंधेरा। गुरु की वाणी जीव और काया को बांधने वाला कर्म के बंधन को गुरु चुटकी भर में तार देगा।
श्रीमद भागवत ज्ञान गंगा प्रवचन के दौरान कथा मर्मज्ञ पंडित भीमाशंकर शास्त्री सीधे तौर पर मानव जीवन पर शब्दों के प्रहार करते हुए कहा कि संस्कृति को उंगली दिखा रहे हैं और बेटी डांस बार में डांस करके आ रही है। हमारी संस्कृति हमारे ही संस्कारों की कमी के कारण बिगड़ती जा रही है। आज की संस्कृति को शिक्षा से ज्यादा संस्कार की जरूरत है।
सबकी शान समान है इसलिए उसका नाम शमशान है-
इंसान के मरने के बाद भले ही वह करोड़ पति हो या निर्धन हो या अनाथ भिखारी सबको एक समान लकड़ी पर लेटाया जाता है किसी को भी गादी तकिया नहीं लगाया जाता,सब समान हैं इसलिए इसका नाम शमशान है।
निशनी आड़ी और झाड़ू कभी खड़ा नहीं रखना चाहिए-
मकान के सामने कभी भी निशनी (सीडी) जमीन पर आड़ी नहीं रखनी चाहिए और घर में झाडू लगाने के बाद कभी भी खड़ा नहीं रखना चाहिए और ना ही कभी झाड़ू को फेंकना चाहिए, और ना ही कभी किसी को देना चाहिए। झाड़ू किसी को देने या फेंकने से घर से लक्ष्मी रुठ जाती है।
बेटी को कभी भी चौक चौराहे पर नाचना नहीं चाहिए -
बहन बेटी को कभी भी चौक चौराहे पर नाचना नहीं चाहिए। हमारी सनातन संस्कृति का अपमान है।
कथा के दौरान किसान मोर्चा जिला अध्यक्ष नवल गीर गोस्वामी, दक्षिण मंडल युवा मोर्चा अध्यक्ष मधुसूदन राजौरा, गुर्जर समाज जिला अध्यक्ष चंपालाल गुर्जर, सरपंच सुरेश नागदा हिंगोरिया, सरपंच बाबूलाल जमुनिया, हरिशंकर अहिर सहित कई गणमान्य लोग कथा में शिरकत कर कथा का रसास्वादन किया।
श्रीमद भागवत ज्ञान गंगा प्रवचन के बीच-बीच में कथा मर्मज्ञ पंडित भीमाशंकर शास्त्री के द्वारा अत्याधुनिक वाद्य यंत्र की स्वर लहरियों के साथ... मारलो डुबकी मारलो डुबकी गंगा बहती जाए..., जैसे दीपक बिना मंदिर सुना नहीं बस तो... गुरु बिना घोर अंधेरा रे संतों..., हल्दी घाटी में समर लड्यों वो चेतक रो अश्वार कठे ..., आदि अपने सुरीले कण्ठ से मधुर भजनों की प्रस्तुति दी। श्रद्धालु जन पूरे मनोभाव के साथ आत्मिक मन को आत्मसात कर रहे हैं। श्रीमद भागवत ज्ञान गंगा महोत्सव प्रवचन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जन ज्ञान गंगा में डुबकियां लगा रहे हैं।
प्रतिदिन श्रीमद भागवत ज्ञान गंगा प्रवचन प्रातः 11.30 बजे से शाम 3 बजे तक प्रवाहित किए जा रहे है। श्रीमद भागवत ज्ञान गंगा समिति के सदस्यों ने क्षेत्र के समस्त धर्मालुजनो से अपील की है कि अधिक से अधिक संख्या में पहुंच कर धर्म लाभ उठाएं।