झालरापाटन। जैसे-जैसे नेत्रदान के विषय की जानकारी बढ़ती जा रही है उसी तरह नेत्रदान के कार्यो में भी वृद्धि हो रही है। किसी भी मृत्यु पर परिवार को केवल एक निवेदन की ही आवश्यकता होती है।
शाइन इंडिया फाउंडेशन के ज्योति मित्र एवं भारत विकास परिषद के नेत्रदान प्रभारी कमलेश दलाल ने बताया कि झालरापाटन निवासी पूर्व राजस्थान बैंक प्रबंधक एवं समाजसेवी सत्यपाल अग्रवाल को हृदयाघात के कारण कोटा के निजी चिकित्सालय कोटा हार्ट हॉस्पिटल में एडमिट करना पड़ा, शुक्रवार सुबह 5 बजे डॉक्टर ने परिवार को जवाब देकर सत्यपाल को मृत घोषित किया उसी समय, सत्यपाल के नजदीकी एवं बांरा के ग्रेन व्यवसाई सुनील अग्रवाल भी इस समय हॉस्पिटल में उपस्थित थे, सुनील ने मृतक की पुत्रवधू अपनी बहिन मोनिका और अपने बहनोई तथा मृतक के पुत्र गौरव अग्रवाल एवं जेष्ठ पुत्र गगन अग्रवाल से पिताजी के नेत्रदान के लिए बात की, सत्यपाल अग्रवाल की सुपुत्री नीलिमा एवं गरिमा की भी नेत्रदान की इच्छा थी एवं मृतक के परिवार से बादल अग्रवाल शाइन इंडिया फाउंडेशन के ज्योति मित्र के रुप में झालावाड़ शहर में नेत्रदान का कार्य कर रहे हैं, ऐसे में तुरंत परिवार में नेत्रदान के लिए सहमति हो गई और सूचना देने पर सुबह 5.30 बजे ही भरी सर्दी में शाइन इंडिया फाउंडेशन की टीम एवं आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान के टेक्नीशियन ने कोटा हार्ट हॉस्पिटल आकर सत्यपाल अग्रवाल का नेत्रदान प्राप्त किया। नेत्रदान के समय सत्यपालजी की धर्मपत्नी गीता देवी, पुत्र गगन एवं गौरव बंसल, पुत्रियां नीलिमा एवं गरिमा अग्रवाल, पुत्रवधू मोनिका, भतीजे बादल अग्रवाल एवं बांरा निवासी सुनील अग्रवाल आदि ने सहयोग किया। मृतक का कॉर्निया अच्छा पाया गया है जिसे आई बैंक जयपुर को भिजवा दिया गया है, जहां यह दो असहाय नेत्रहीन लोगों को नई नेत्र ज्योति प्रदान कर सकेगा।
कमलेश दलाल ने आगे और जानकारी देते हुए बताया कि मृत्यु के पश्चात जितनी शीघ्रता से नेत्र उत्तसरण हो जाए उतनी ही अधिक कॉर्निया की कार्यकुशलता अच्छी रहती है। चूंकि संभाग की प्रमुख नेत्र उत्सरण संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन का मुख्यालय कोटा में है ऐसे में यदि कोई मृत्यु कोटा के किसी चिकित्सालय में हुई हो और परिवार की नेत्रदान की इच्छा हो तो निवास स्थान पर लाकर नेत्रदान करने की अपेक्षा कोटा चिकित्सालय में ही उसका नेत्रदान करवाना श्रेष्ठ रहता है, शाइन इंडिया फाउंडेशन के द्वारा अनेकों बार एंबुलेंस में भी नेत्रदान लिया गया है।