मंदसौर। शहर के कलाम नाम से प्रसिद्ध नारू भाई मेव का एक नया चेहरा सामने आया है जिसमे पुराने गाने और पुराने वाद्य यंत्रों को सहेजकर रखना ये है नारू भाई समाज सेवी। नारू भाई के आफिस में आज भी पुराने वाद्य यंत्र मौजूद हैं और उनका जब भी मन होता वो पुराने गाने सुनने लगते हैं नारू भाई ने मीडिया को बताया कि हमारे जमाने के 70 के दशक में एलपी चलती थी उस समय पहले ग्रामों फोन चलते थे जो बिना बिजली के चलते थे उसके बाद एक और म्यूजिक सिस्टम निकला जिसको रिकार्ड प्लेयर बोलते है मैने पहले डेकोरेशन का काम भी किया है उसी समय से खास शोक है इन चीजों का और आज भी मेरे पास ये सभी मौजूद हैं और मुझे जब समय मिलता तो गाने बजाता हूं और सुनता हूं सदाबहार नगमे है इनको कभी भुला नहीं जाता इन गानों के अन्दर दर्द छुपा हुआ है और इंसान इन गानों को सुनेगा तो कुछ गम भूल जाता है और अपनी पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं में भी पुराने गाने सुनता हूं अभी के जो नए गीत है वो आए गए कोई खास नहीं है पुराने गीत है लता, मंगेशकर के मुकेश ,मोहमद रफी के वो कभी नहीं भूले जायेंगे मेरे पास इन सभी के गीत उपलब्ध है जब सुनो तब एक ताजगी महसूस होती हैं इंसान इन संगीत ले तो एक तरोताजा महसूस करता है कुछ पल के लिए अच्छा महसूस करता है।