चित्तौड़गढ़। गरीब आदमी की सेवा करने से मंदिर में बैठे शनिदेव बिना भक्ति के ही प्रसन्न हो जाते हैं। जहाँ नारियों का सम्मान होता है वहां पर शनि भगवान जल्दी प्रसन्न होते हैं। नारी की आंखों में कभी भी आँसू नहीं आने चाहिये। जिस घर में बहु-बेटी लड़ाई झगड़ा करती है उस खानदान का जल्दी नाश हो जाता है।
उक्त विचार कथा वाचक जगदीश वैष्णव ने सोमवती अमावस्या पर ओछड़ी गेट के पास शनिदेव कथा के आयोजन पर व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन शनि भगवान का कीर्तन करना चाहिये। कीर्तन भक्ति व शनिदेव देवता के तेल चढ़ाने से शान्ति प्रदान होती है, इसलिये भगवान शनि पर तेल चढ़ाया जाता है। नारी जब-जब चण्डी बनी ब्रह्मा, विष्णु, महेश को झुकना पड़ा। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों को हिला दिया। हमें मां चाहिये, बहिन चाहिये, भुआ चाहिये, परन्तु लड़की नहीं चाहिये। कन्या अपना भाग्य स्वयं लेकर जन्मती है। लड़की तीन पीढ़ियाँ तारती है। अपने माता-पिता, पति तथा नाना-नानी का। इसलिये हमें भ्रुण हत्या बंद करनी चाहिये। सोमवती अमावस्या पर कन्हैयालाल लौहार के निवास पर हुए कार्यक्रम में कई भक्तजनों ने कथा का लाभ लिया। लौहार समाजजन द्वारा जगदीश वैष्णव महाराज का मेवाड़ी पगड़ी पहना कर स्वागत किया गया। कथा के दौरान कंचनवाली काया, सैलानी पावणा, सांवरिया सेठ देदे, गुमादे म्हारा बालाजी जैसे भजनों पर कई भक्तगण झूम उठे। कथा के बाद प्रसाद वितरण हुआ।