नीमच। आज से शासकीय चिकित्सकों के हड़ताल पर जाने से जिला चिकित्सालय की स्वास्थ्य सेवाओं पर इसका सीधे तौर पर विपरीत असर दिखाई दे रहा है। फिलहाल जिला चिकित्सालय की सेवाएं आयुष विभाग के चिकित्सक और पीजी स्टूडेंट्स के भरोसे पर है। नीमच जिला चिकित्सालय के करीब 34 डॉक्टर हड़ताल पर है। केवल सीएमएचओ और सिविल सर्जन ड्यूटी पर तैनात है।
नीमच जिले की बात करें तो 60 और प्रदेश भर के 15000 चिकित्सक अपनी मांगों के समर्थन में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। शासकीय चिकित्सकों की मांग है कि डायनामिक ऐश्शयोर्ड कैरियर प्रोग्रेशन लागू हो। स्वास्थ्य संविदा कर्मचारियों को नियमित किया जाए और चिकित्सकीय सेवाओं में प्रशासनिक दखलअंदाजी बंद की जाए। अपनी मांगों को मनवाने के लिए शासकीय चिकित्सक नीमच जिला चिकित्सालय में धरने पर बैठे हैं। डॉक्टर्स का कहना है कि वे इमरजेंसी सेवाएं भी बंद रखेंगे। हालांकि प्रशासन ने जिला चिकित्सालय की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चलाए रखने हेतु आयुष विभाग के डॉक्टर्स और पीजी स्टूडेंट को ड्यूटी पर लगाया है। इधर एनएचएम संविदा कर्मी भी हड़ताल पर है।
चिकित्सकों एवं संविदा कर्मियों के हड़ताल पर जाने से सारी व्यवस्था चरमरा गई है। राज्य सरकार यदि तुरंत कोई समझदारी भरा निर्णय नहीं लेती है तो गरीब मरीजों पर इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है। चुकी स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ शासकीय चिकित्सकों से जुड़ी अन्य व्यवस्थाएं भी हड़ताल की वजह से प्रभावित हो रही है। कलेक्टर दिनेश जैन ने भी जिला अस्पताल के निरीक्षण के दौरान हड़ताली डॉक्टरों से मुलाकात की। कलेक्टर दिनेश जैन का हालांकि भरसक प्रयास है कि हड़ताल की वजह से मरीजों को कोई असुविधा ना हो।
धरने पर डॉ मनीष यादव, डॉ निरुपा झा, हितेंद्र सिसोदिया, डॉक्टर संगीता भारती, प्रवीण पंचाल, शक्ति वाला, सुजल गुप्ता, प्रशांत राठोर, आशीष जोशी, डॉक्टर दिनेश पाटीदार एवं अन्य चिकित्सक शामिल रहे।