नीमच। स्वच्छता सर्वेक्षण में नीमच की रैंकिंग को टॉप टेन की सूची में स्थान दिलाना नगरपालिका के लिए नाक का सवाल बन गया है। जुबानी जमा खर्च करके यह राग बार-बार अलापा जा रहा है कि नीमच को स्वच्छता और सुंदरता के मामले में हिंदुस्तान के नक्शे पर स्थापित कर देना है। लेकिन सवाल यह उठता है कि इसे धरातल पर संभव करें कैसे? अव्वल तो स्टाफ और संसाधन सीमित है। दूसरा और अहम योजनाबद्ध प्रयास की कमी है। जगह-जगह कचरे के ढेर, सार्वजनिक टॉयलेट की बदहाल स्थिति, खुले में शौच, सिंगल यूज़ प्लास्टिक का उपयोग, जलकुंभी, गाजर घास, नालों की सफाई, जरा सी बारिश में फैला कीचड़, बिखरा हुआ कचरा आदि अनेक ऐसे मुद्दे हैं जिस पर गंभीरतापूर्वक ध्यान देना आवश्यक है।
हम सचमुच नीमच को स्वच्छता के क्षेत्र में बेहतर दिखाना चाहते है तो कमरों में बैठकर मीटिंगों में की गई बातों को अमलीजामा पहनाना होगा। ऊपर से लेकर नीचे तक नगर पालिका अध्यक्ष, जनप्रतिनिधि, वार्ड पार्षद अधिकारी और कर्मचारी तक को मैदान में उतरना होगा। केवल जनता से जागरूकता की अपील करके नीमच को स्वच्छता रैंकिंग में श्रेष्ठ नहीं बनाया जा सकता। नगरपालिका अमले को अपने काम से नीमच की जनता में एक अपील पैदा करनी होगी जिससे जागरूकता जनता के मन में अपने आप पैदा हो।
जनता से अपील के साथ नपा को कुछ कठोरता भी अपनानी होगी। जो भी निर्णय लिए जाए और नियम बनाए जाए उनका कठोरता के साथ पालन भी नपा को करवाना चाहिए। जो बनाए गए नियमो को तोड़ता है उन पर जुर्माना सख्ती के साथ वसूला जाए। नाम मात्र की कार्यवाई करने से जनता भी बेफिक्र हो जाती है। कॉलोनियों से लगाकर, व्यापारियों और स्वल्पाहार के प्रतिष्ठानों को भी सख्त हिदायत देने की जरुरत है।