भोपाल। विधुत उपभोक्ताओं को नये बिजली कनेक्शन देने की मौजूदा ऑनलाइन व्यवस्था को अपग्रेड कर और अधिक सरलीकृत किया जा रहा है। अब नये कनेक्शन के लिए ऑनलाइन आवेदन करने के तुरंत बाद ही उपभोक्ता को एसएमएस और बिजली कंपनी द्वारा समस्त औपचारिकताएँ पूर्ण कर विधिवत भरे गए आवेदन पर कार्यवाही करते हुए लाइनमेन नये कनेक्शन के लिए मीटर लेकर उपभोक्ता के परिसर में पहुँच जाएगा। बिजली खंभे से उपभोक्ता के परिसर में स्थापित होने वाले मीटर की दूरी तक सर्विस केबल लगाने की सुविधा सशुल्क मुहैया कराई जाएगी। राज्य शासन के जल-जीवन मिशन, महिला-बाल विकास की आँगनबाड़ी, शिक्षा विभाग के स्कूल आदि के बिजली कनेक्शन अविलम्ब जारी करने के विद्युत विभाग द्वारा निर्देश दिये गए हैं । इन कनेक्शनों को जारी करने में किसी भी स्तर पर किसी प्रकार की कोताही बरतने वालों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाएगी। सभी मैदानी अधिकारियों को सचेत किया कि ट्रांसफार्मर असफलता की दर 5 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। जिन स्थानों पर एक से अधिक बार ट्रांसफार्मर फेल हुए हैं, उन स्थानों को चिन्हित किया जाए और वहाँ ट्रांसफार्मर की क्षमता बढ़ाई जाए, जिससे निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
बिजली लाइनमेन को सुरक्षा के सभी उपकरण उपलब्ध करा दिए गये हैं। लाइनमेन सुरक्षा उपकरणों के साथ ही बिजली सुधार का कार्य करें। लाइनमेन के साथ घटित होने वाली घातक तथा अघातक विद्युत दुर्घटनाओं की जाँच की जाएगी एवं लापरवाही पर दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी। ऑपरेशनल दक्षता में वृद्धि के लिए कंपनी की प्रत्येक ऑपरेशनल इकाई को बेहतर प्रदर्शन करते हुए बिलिंग दक्षता और राजस्व संग्रहण दक्षता में सुधार लाने के लिए प्रतिबद्ध होना होगा। खराब तथा जले मीटर अभियान चला कर बदले जाएँ। शहरी क्षेत्रों में एक भी खराब तथा जला मीटर नहीं होना चाहिए। निम्न दाब के उद्योग और 10 किलोवाट से ऊपर वाले उपभोक्ताओं के एएमआर मीटर को दुरूस्त रखने के निर्देश दिये। बड़े कस्बों में जले तथा खराब मीटर वाले परिसरों को चिन्हित कर नए मीटर लगाए जाएँ। ऑपरेशनल प्रॉफिट बढ़ाने के लिए राजस्व वसूली पर ध्यान दिया जाए।
उपभोक्ता संतुष्टि के लिए हर संभव प्रयास किये जाएं। मानसून का सीजन आने वाला है। उससे पहले उप केन्द्रों, 33 के.व्ही., 11 के.व्ही. एवं एल.टी. लाइनों एवं ट्रांसफार्मर्स इत्यादि का प्रभावी ढंग से रख-रखाव किया जाए, जिससे शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत अवरोध न्यूनतम हो। मैदानी अधिकारियों से फीडबैक के आधार पर मासिक/वार्षिक राजस्व तथा निर्माण कार्यों के लक्ष्य निर्धारित किये गये।