इन्दौर। कुछ दिनों पहले रिश्तेदार और समाजजन हमारे टूटे-फूटे झोंपड़े में आने से कतराते थे और हमें सामूहिक आयोजनों में भी नहीं बुलाते थे। पुत्र और पुत्री की सगाई भी नहीं हो पा रही थी और हम परेशान थे। मगर सरकार ने सुनी और हमें पक्का आवास मिल गया। इसके बाद हमें सामाजिक सम्मान तो मिला ही दोनों बच्चों के रिश्ते भी तय हो गए। सब कुछ सामान्य हो गया। यह कहना है ग्राम पंचायत गोगाखेडी की कल्याणी वर्ग की सुगनबाई पति शंकरलाल का
बकरी चराने वाली कल्याणी सुगन बाई ने कभी सोचा ही नहीं था कि उसका भी कभी पक्का मकान होगा। दो जून की रोटी का इंतजाम भी बड़ी मुश्किल से हो रहा था। खपरैल और टूटे पतरे के मकान में गुजर बसर हो रही थी। इसके चलते बच्चों के रिश्ते भी तय नहीं हो रहे थे। गरीबी और तंगहाली के कारण उन्हें सामाजिक आयोजनों और समारोह में भी नहीं बुलाया जाता था रिश्तेदारो ने भी मुंह मोड लिया और उनके घर नहीं आते थे। सुगनबाई की जब पता चला की सरकार उनके जैसे लोगों को पक्का मकान बनाकर दे रही है तो उन्होंने ने भी प्रयास किया। आवेदन स्वीकृति के बाद प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान मिल गया। वे और उनका परिवार बहुत खुश है। उनका कहना है कि सरकार ने हमें समाज में सम्मान दिलाया है। उनका जीवन स्तर भी सुधर गया। पक्का आवास मिलने के बाद जहां समाजजन और रिश्तेदार उनके घर आने लगे हैं यहीं दोनों बच्चों के रिश्ते भी तय हो गए हैं। सरकार का आभार व्यक्त करते हुए सुगनबाई कहती है कि सरकार ने उनकी चिंता दूर कर दी है। जिस सम्मान के लिए वे वंचित थी उसे सरकार ने दिला दिया है।
--
वॉइस ऑफ़ एमपी की मुहीम- बेज़ुबान पक्षियों के लिए दान करें सकोरे या फिर अपने मकान की छत पर रखे सकोरे, भीषण गर्मी में सुने इनकी फ़रियाद।