डबरा। नगर पालिका परिषद की बैठक में आज जबरजस्त हंगामा देखने को मिला। बैठक के दौरान पक्ष विपक्ष के पार्षद विकास कार्यों को लेकर बहस बाजी करते हुए साफ तौर पर देखे गए। वहीं अंत में बहुमत के साथ करीब 15 करोड़ रुपए के विकास कार्यों सहित 1500 के करीब नामांतरण के प्रकरण परिषद ने स्वीकृत किए।
दरअसल आपको बता दें कि आज यानी सोमवार को परिषद की बैठक होना तय हुआ था। जिसके बाद आज सुबह 11:00 बजे से परिषद की बैठक शुरू हुई जहां अध्यक्ष लक्ष्मी देवी ने बैठक की शुरुआत की। बैठक में जैसी है पीआईसी ने काम स्वीकृत कराने के लिए रखे तो पक्ष विपक्ष के बीच बहसा बासी शुरू हो गई और एक दर्जन के करीब पार्षदों ने साफ तौर पर आरोप लगाया। कि जो लोग अध्यक्ष के साथ हैं उनके वार्डो में काम किए जा रहे हैं। बाकी विरोध करने वाले पार्षदों के बिल्कुल भी काम नहीं किए जा रहे। वही बैठक में कांग्रेस पार्षद हीरा सरदार ने शहर का मुख्य मुद्दा उठाते हुए कहा कि नगर पालिका में ठेकेदार 40 से 45 परसेंट ब्लो पर काम ले लेते हैं और बाद में गुणबढ़ता हीन काम करते हैं। इसलिए इन कामों को मोबाइल वैन से चेक करवाया जाए। और काम सही मिले तो ही इनका भुगतान किया जाए। वही पीआईसी सदस्य धर्मेंद्र सिंह (हैप्पी) ने बताया कि आज परिषद की बैठक में सर्व समिति से करीब 15 करोड़ रुपए के विकास कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इसके साथ ही शहर का मुख्य मुद्दा नामांतरण जो बंद था। उसे हमने आज चालू किया है। और 2016 से 2020 तक के करीब 1500 नामांतरण आज हमने स्वीकृत कर दिए हैं। कुछ विवादित नामांतरण को रोका गया है। जिन्हे आगे की बैठक में पास कर दिया जाएगा।
नगर पालिका परिषद की बैठक के दौरान तीन बार से निर्दलीय पार्षद अनिल जायसवाल (अन्नी) ने बैठक में विरोध का नया तरीका अपनाया। सबसे पहले उन्होंने हाथों में खंभों पर लगी स्ट्रीट लाइटों को उठाया और अध्यक्ष एवं सीएमओ से सवाल किया कि जो लाइट है। गारंटी पीरियड में आती हैं। उन लाइटों को ना खरीदते हुए ऐसी लाइटें खरीदी जो दो 2 महीने में ही खराब हो गई। शासन के पैसे का क्यों दुरुपयोग किया जा रहा है। परिषद ने ठेकेदार को ब्लैक लिस्टेड करने और आने वाले समय में गारंटी वाली कंपनी की लाइट खरीदने की बात कहीं। बैठक में 2:00 बजे से अधिक का समय होने के बाद बैठक में भोजन आदि की व्यवस्था नहीं होने के चलते निर्दलीय पार्षद अनिल जायसवाल ने अपने घर से खाने का टिफिन मंगवा लिया और बैठक के दौरान वह खाना खाने लगे और यह भी कहा कि आने वाली बैठकों में कम से कम खाने की व्यवस्था तो की जाए ताकि पार्षद भूखे ना रहे।