चित्तौड़गढ़। शेषनाग ने जैसे पृथिवी को धारण किया है ठीक उसी प्रकार से श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय ने वैदिक संस्कृति को धारण किया है, भारतीय संस्कृति एवं विरासत को आगे बढ़ाने का कार्य जो वेदपीठ द्वारा किया जा रहा है वास्तव में समूचे राजस्थान को गौरवान्वित करने वाला है। वेद भारत की आत्मा है तथा उस आत्मा में शांति, चरित्र, अहिंसा, प्रेम, सौहार्द का निवास है। उपर्युक्त बाते राजस्थान संस्कृत अकादमी के निदेशक डॉ संजय झाला ने कही। वे मंगलवार को निम्बाहेड़ा कल्याण लोक स्थित श्री कल्लाजी वेदपीठ एवं शोध संस्थान में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि वेदों के मंत्रो एवम यज्ञ विज्ञान का प्रायोगिक स्वरूप समाज के सामने लाने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। कल्लाजी वेदपीठ का कार्य सराहनीय है । विश्वविद्यालय प्रवक्ता डॉ मृत्युञ्जय तिवारी ने बताया कि राजस्थान संस्कृत अकादमी के निदेशक डॉ. संजय झाला, सचिव हृदयेश चतुर्वेदी व जगद्गुरू रामानंदाचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय से वेद विभाग के सहायक आचार्य डॉ देवेन्द्र शर्मा तथा अन्य सदस्य भी पधारे । संस्कृत अकादमी द्वारा इसी माह 4 मई को श्रेष्ठ वेद विद्यालय का सम्मान भी मिला था ।
इस मौके पर विश्वविद्यालय के चेयर पर्सन कैलाश चन्द्र मूंदड़ा ने कहा कि अंतिम सांस तक वेदों की सेवा करना ही हमारा उद्देश्य है। वेदपीठ द्वारा समय समय पर समाज शुद्धिकरण का कार्यक्रम भी किया जाता रहा है विगत 15 वर्षो में समाज से विभिन्न व्यसन व कुरीतियों को भी दूर किया गया है। निंबाहेड़ा उपखंड क्षेत्र वैदिक यज्ञों के प्रभाव से पर्यावरण शुद्धता को प्राप्त किया है। उन्होंने सरकार से भी वेदों की ओर अग्रसर इस पुनीत कार्य में सहयोग के लिए निवेदन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ ठाकुर श्री के विग्रह पूजन से प्रारंभ हुआ, जबकि आए हुए अतिथियों का स्वागत तुलसी माला और उपरना से किया गया ।
कार्यक्रम में परीक्षा नियंत्रक डॉ चंद्रवीर सिंह राजावत, प्रधानाचार्य गोपाल शर्मा, यजुर्वेद के आचार्य त्रिलोक चंद्र शर्मा, अथर्ववेद के आचार्य संदीप शर्मा, ज्योतिष विभाग से डॉ मेघराज शर्मा, हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ अशोक शर्मा, संस्कृत विभाग से शिवानी शर्मा, लेखाकार राजकुमार साहू, मनीष चांदना, धीरज मिश्र, विष्णुकांत शर्मा, मनीष सोनी, अमरीश त्रिपाठी ओम पांडेय आदि उपस्थित रहे। संचालन ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ मृत्युञ्जय तिवारी ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन संदीप शर्मा ने किया ।