गरोठ। तहसील के ग्राम कोटडा बुजुर्ग मे मंगलवार को एक बैल की मौत हो गई, तो घरवालो ने उसका भारतीय संस्कृति अनुसार विधी विधान पुर्वक से समाधी दी। ट्रेक्टर को सजाकर उसकी अंतिम यात्रा निकाली गई है। नम आँखों से परिवार के लोगो ने विदाई दी। परिवार में वह परिवार के सदस्य की तरह था। जब बैल चलने मे असमर्थ हुआ तब से परिवार वाले उसकी सेवा एक परिवार के सदस्य कि तरह कर रहे थे। मंगलवार को बैल ने अंतिम सांस ली।
कोटडा बुजुर्ग के बालकिशन पाटीदार ने बताया कि 2003 में हम इसको घर लाये थे, घर पर इसके आने के बाद हमारी स्थिति में सुधार हुआ, खेतों मे अच्छी पैदावारी होने लगी।
आप देखा होगा इस जमाने में लोग अपने माता पिता तक को वृध्दाश्रम में छोडते हुए देखा है। पत्नि को छोड देते है,बच्चो को छोड देते है, पर यहां कोटडाबुजुर्ग में बालकिशन पाटीदार के परिवार के लोगो ने आखरी समय तक इसकी सेवा की है। वह करीब 20 साल तक परिवार से जुडा रहा है।