नीमच। विकास यात्रा और विकास पर्व मनाने से अपने आप विकास नहीं होता। प्रदेश का बंटाधार करने के बाद घोषणा वीर मुख्यमंत्री जगह-जगह शिलान्यास और यात्राएं निकालकर अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहे हैं। कर्मचारी, अधिकारी, संविदा कर्मी, नौजवान युवा, किसान, व्यापारी के साथ प्रदेश में हर वर्ग आज दुखी है वही अब लाडली बहना योजना 2.0 महिलाओं की परेशानी का सबब बन रही है। महिलाएं पंजीयन के लिए भटक रही हैं, लाइनों में लग रही है और योजना की विसंगतियों से परेशान और निराश होकर घर लौट रही हैं। दूसरी ओर चौपट कृषि व्यवस्था, चौपट रोजगार व्यवस्था, चौपट भर्ती व्यवस्था, चौपट शिक्षा, स्वास्थ्य व्यवस्था, चौपट पोषण व्यवस्था, चौपट उद्योग धंधे। आज प्रदेश में पैसे दिए बिना कोई काम नहीं होता है। मध्यप्रदेश का नौजवान रोजगार के लिए भटक रहा है और प्रदेश का अन्नदाता खाद बीज और फसलों के उचित मूल्य के लिए भटक रहा है।
उक्त बात कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री मधु बंसल ने कही। उन्होंने कहा कि शिवराज सरकार महिलाओं को हजार रुपया देकर उनके पति, पिता और भाई से कहीं ज्यादा राशि वसुलेगी। शिवराज सरकार की मंशा यदि आम जनता को लाभ पहुंचाने की होती तो पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम कम करके सीधी राहत पहुंचाती लेकिन सरकार की मंशा इसके विपरीत है। शिवराज सरकार ने घोटालों का रिकॉर्ड कायम कर प्रदेश को भ्रष्ट प्रदेश बना दिया है और अब उन्हें 18 साल बाद बहने याद आ रही है।
बंसल ने कहा कि प्रदेश में भाजपा को आने वाले विधानसभा चुनाव में अपनी हार का पूरा पूरा आभास हो चुका है। ऐसे में लाडली बहना योजना लागू की गई। मगर कांग्रेस के प्रति जनता का रुझान और नारी सम्मान योजना की घोषणा से विचलित मुख्यमंत्री चौहान ने लाडली बहना 2.0 का दांव फेंका है। इसके बावजूद पहले लागू की गई लाडली बहना और अब लाडली बहना 2.0 दोनों में ही हजारों महिलाएं योजना से वंचित हैं। जानबूझकर योजना में ऐसे नियम बनाए गए जिससे कम महिलाएं ही जुड़ पाए। इस कारण यह योजना फ्लॉप साबित होकर महिलाओं में निराशा का कारण बन रही है। इस योजना में जबरदस्त विसंगतियां भी सामने आई है।
लाडली बहना योजना फ्लॉप-
बंसल ने बताया कि प्रदेश की अविवाहित महिलाओं को इस योजना का लाभ नहीं दिया जा रहा है। वहीं 18 से 21 साल की विवाहित महिलाएं भी योजना से वंचित है। और तो और हजारों वास्तविक और पात्र महिलाओं को इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जबकि कई अपात्र महिलाओं को इसका लाभ मिल रहा है। चार पहिया वाहन मालिक और आयकर दाता परिवार की महिलाएं योजना का लाभ उठा रही है और पात्र महिलाओं के खाते में इस योजना के पैसे ही नहीं पहुंच पा रहे हैं और वह परेशान होकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं। पहले राउंड में छूट गई महिलाएं भी अपना नाम जुड़वाने के लिए परेशान होती देखी जा रही है। प्रदेश की महिलाओं को इस योजना का लाभ नहीं मिलने से आक्रोश देखा जा रहा है, इसके चलते योजना फ्लॉप साबित हो रही है।
लाडली बहना 2.0 में भी कई विसंगतियां-
इस योजना में 21 से 23 वर्ष की विवाहित महिला ही आवेदन कर सकती हैं ऐसे में इस आयु वर्ग की हजारों अविवाहित वंचित रहेगी। तथा 23 से 60 वर्ष की महिलाओं को जिनके परिवार में ट्रैक्टर हैं उनके नाम ही इस योजना में जोड़े जा रहे हैं। और जिनके यहां ट्रैक्टर नहीं है वह इस योजना में शामिल नहीं हो सकती। ट्रैक्टर का वेरिफिकेशन भी आरटीओ के माध्यम से किया जाएगा। एक तरफ सरकार कार रखने वाले परिवार की महिलाओं को योजना का लाभ नहीं दे रही वहीं दूसरी ओर अपनी ही बात का उल्लंघन करते हुए ट्रैक्टर रखने वाले परिवार की महिलाओं को पात्र मान रही है।
प्रदेश में डेढ़ करोड़ महिलाएं योजना से बाहर-
बंसल ने कहा कि प्रदेश में कुल महिला मतदाताओं की संख्या 2 करोड़ 60 लाख है। अभी तक इस योजना में मात्र एक करोड़ महिलाओं का ही पंजीयन हो सका है जबकि डेढ़ करोड़ से अधिक महिलाओं को इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में महिलाओं को लाभ पहुंचाने की सरकार की मंशा पर अनेक सवाल खड़े हो रहे हैं। आने वाले समय में यह महिलाएं ही इस सरकार का तख्ता पलट करेगी।