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August 15, 2023, 12:47 pm
KHABAR : तकनीकी सशक्तिकरण से उजागर हो रहे शिक्षा के नए आयाम, डिजिटल संसाधन कर रहे शिक्षण का विस्तार, शिक्षा अब दायरो में सीमित नहीं, पढ़े खबर 

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खरगोन। आज के इस प्रगतिशील युग में प्रौद्योगिकी लगभग हर क्षेत्र में क्रांति ला रही है। तकनीकी विकास ने शिक्षा के क्षेत्र पर भी रचनात्मक प्रभाव डाला है। इस पर प्रकाश डालने एवं शिक्षा के क्षेत्र नए संभावनाओं पर प्रकाश डालने के लिए शासकीय महाविद्यालय खरगोन में आईक्यूएसी के तत्वधान में सोमवार को अध्ययन/अध्यापन में आधुनिक तकनीक का प्रयोग एवं उपयोगिता विषय पर वेबिनार का आयोजन किया गया। महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. आरएस देवड़ा ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि कैसे पहले के दौर में क्लासरूम चार दिवारी में सीमित थे एवं अभावों के कारण ज्ञान के स्रोतों के लिए संघर्ष करना पड़ता था। वही आज दुनिया भर की जानकारी हमारी उंगलियों पर है। नई तकनीक जैसे वर्चुअल क्लासरूम, आर्टिफिकेल इंटेलीजेंस के विकास ने शिक्षा के नये आयामों को तलाशा है। ऑनलाइन संसाधनों ने सीखने एवं सीखने की सीमाओं का विस्तार किया है। पर इस आधुनिकता की दौड़ में यह सबसे चुनौतीपूर्ण है कि किस प्रकार छात्रों को इंटरनेट का उचित एवं बेहतर उपयोग सीखना है। आईक्यूएसी प्रभारी डॉ. वंदना बर्वे ने कहा कि तकनीकी समावेशन से शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता को बढ़ावा मिलेगा। कन्वेनर प्रो. भटनिया ने भी शिक्षण में प्रोद्योगिकी के प्रभाव को परिवर्तनकारी बताते हुए कहा कि तकनीक का उपयोग से शिक्षक प्रत्येक छात्र की ताकत, जिज्ञासा, कमजोरियो एवं रुचियों को समझ कर शिक्षण को अधिक समावेशी एवं आकर्षक बना सकते है। प्रथम प्रवक्ता कोटा विश्वविद्यालय राजस्थान डॉ. नम्रता सेंगर ने टॉपिक पर प्रकाश डालते हुए नए-नए ऑनलाइन संसाधनों और सॉफ्टवेयर जैसे माइंड मैप्स, एक्टिव एनिमेटेड विडियोज के उपयोग से पढ़ाई को आसान और मजेदार बनाया जा सकता है। द्वितीय प्रवक्ता कोयंबटूर विश्वद्यालय तमिलनाड से डॉ. एस रथिनावेल जुड़े। उन्होंने भी उच्च शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में तकनीक जैसे जियो जेब्रा आदि का उपयोग कर बेहतर परिणाम तक पहुंचा जा सकता है। देश के अलग अलग हिस्सों से प्रबुद्ध लोगों ने कार्यक्रम में भागीदारी की। कार्यक्रम को सफल बनाने में आयोजन समिति सदस्य डॉ. दिनेश चौधरी, प्रो. ऐश्वर्या दिलावारे, प्रो. संतोष राठौड़, प्रो. राहुल मानवे, प्रो. शशांक गोले ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। प्रो. अमिका बिरले ने आभार माना।

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