सरवानिया महाराज। शहर मे आरओ का शुद्ध पानी घर घर तक पंहुचाने के लिए सन 2012/16 मे बनी मुख्यमंत्री शहरी पेयजल योजना जिसकी अनुमानित लागत बारह करोड़ सत्तर लाख है अभी तक शहरवासियों के घर तक नहीं पहुंची है। प्रदेश के मुख्यमंत्री के हाथों 5 मार्च 2018 को उद्घाटित योजना तमाम तरह की तकनीकी तथा सरकारी व अन्य तरह की प्रकृति प्रदत्त खाम़ियों के कारण पिछले पैसठ माह यानी कि पांच साल और पांच महीने से पांव - पांव चल रही हैं। जबकि इस योजना को दिसंबर 2020 मे शहरवासियों के घरों तक पहुंच जाना था। इस पर भी योजना को धरातल पर लाने वाली सुरत गुजरात की भागीरथी कंपनी मेर्सस इंजीनियरिंग प्रोफेशनल कंपनी लिमिटेड अपने आप को खुद ही जस्टिफाई कर अपने आप को पाक साफ मानते हुए योजना के पांव - पांव चलने के लिए शहर के जनप्रतिनिधियों और शासन के मध्यप्रदेश सड़क विकास प्राधिकरण व राजस्व विभाग के साथ साथ कोविड 19 की लहरों को जिम्मेदार ठहराते हुवे देरी का ठिकरा फोड़ा है।
इस मुख्यमंत्री शहरी पेयजल योजना के तहत शहर वासियों को शुद्ध आर ओ का पानी मिलना है । सन 2012 मे इस योजना को शासन ने हरी झंडी दिखाकर मध्यप्रदेश के शहरों की ओर रवाना किया था। नगर परिषद सरवानिया महाराज मे इस योजना की प्रोजेक्ट डेवलपमेंट रिपोर्ट डीपीआर सन 2016 मे बनकर तैयार हुई जिस वक्त इस की लागत 12 करोड़ 70 लाख रुपये आंकी गई थी। योजना की लागत की 30 प्रतिशत राशि मध्यप्रदेश सरकार वहन करेगी तथा शेष 70 प्रतिशत राशि बैंक से ऋण लेकर लगाना है । जिसके भुगतान के एवज में 25 प्रतिशत राशि नगर परिषद को मिलाना है तथा 75 प्रतिशत राशि मध्यप्रदेश शासन किस्तों में भुगतान करेगा। योजना में देरी के कारण आमजनों के सपने हो रहे है चुर चुर।
सात किलोमीटर मुख्य लाईन पन्द्रह वार्ड-
मुख्यमंत्री शहरी पेयजल योजना में मोरवन बांध से सरवानिया महाराज तक सात किलोमीटर मुख्य लंबी लाईन तथा नगर परिषद के पन्द्रह वार्ड को कवर करना है। इसके साथ ही मोरवन बांध स्थल पर पंप हाउस का निर्माण , वाटर डंपिंग व फिल्टर प्लांट , पानी की टंकी का निर्माण , बिजली कनेक्शन , कर्मचारी आवास , इससे संबंधित लेखों जोखों को नगर परिषद में अपडेट करना शामिल तो है लेकिन योजना धरातल पर पुरे बत्तीस माह देरी से चल रही हैं। योजना के तहत मोरवन मे बनने वाले पंप हाउस का अभी काम ही शुरू नहीं हुआ है। 10/20 प्रसेंट मुख्य लाईन का काम पेंडिंग है। वहीं कुछ वार्ड के कुछ ऐरिये में इस योजना की कनेक्शन पाईप लाईन ही नहीं डाली गई है। तथा वाटर डंपिंग कम फिल्टर प्लांट , टंकी निर्माण भी अधुरे है।
एमपीयूडीसीएल योजना का भागीरथ-
सन 2012 मे पचास हजार से अधिक व पचास हजार से कम शहरी क्षेत्रों के लिए बनी मुख्यमंत्री शहरी पेयजल योजना को धरती पर उतारने के लिए सरकार ने मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड को बतौर माध्यम भागीरथ बनाया गया। योजना का प्रारूप तैयार कर टेंडर प्रक्रिया के बाद ईएस और टीएस सेंशन का काम भी डायरेक्ट भोपाल से एमपीयूडीसीएल द्वारा ही किया गया। टेंडर गुजरात की इंजीनियरिंग प्रोफेशनल कंपनी लिमिटेड , साऊथ गुजरात के होकर योजना पर पांव पांव काम चल रहा है।
देरी से चल रही योजना पर कंपनी को ब्लैक लिस्टेड करने के पत्र की चर्चा-
बत्तीस महीने देरी से चल रही शहरी पेयजल योजना की मानिटरिंग मे तात्कालिक एंव वर्तमान मुख्य आयुक्त पी. नरहरि के पत्र कलेक्टर शहरी विकास नीमच को प्राप्त हुआ तो ऐसी चर्चा है कि तात्कालिक डीएम मंयक अग्रवाल ने कंपनी को ब्लैक लिस्टेड करने की अनुशंसा राज्य सरकार से एक पत्र लिखकर कर दी थी। उसके बाद कंपनी के अधिकारी चेते और काम के सिलसिले में जनप्रतिनिधियों के साथ बेठक की।
परिषद ने दिये कंपनी को नोटिस-
मुख्यमंत्री शहरी पेयजल योजना की धीमी गति के कारण नगर परिषद सरवानिया द्वारा कंपनी को गुणवत्ता पुर्ण कार्य समय सीमा में नहीं करने पर नोटिस देकर कार्य को करने की कहा। मुख्य नगरपालिका अधिकारी राजेश गुप्ता ने बताया कि पेयजल योजना में टेंडर की शर्तों के मुताबिक लापरवाही बरतने के कारण कंपनी को नोटिस दिये थे। योजना में वर्तमान में जमीन संबंधी कोई विवाद नहीं है।
देरी को लेकर मेरी क्या जिम्मेदारी है-
इंजीनियरिंग प्रोफेशनल कंपनी लिमिटेड के डायरेक्टर तन्मय तरफदार को जब इस योजना की अवधि पूरी होने के बाद भी धीमी गति से चलते काम को लेकर बात की तो तरफदार ने कंपनी की तरफदारी करते हुए पहले तो यह कहा कि मेरे नंबर किसने दिए , मेरी क्या लायबिलिटी है देरी को लेकर मैं क्यों आपको इसके बारे में जानकारी दु , संबंधित विभाग से पुछो , मेरे नबंर देने वाले पर कार्रवाई करूंगा। लेकिन जब संवाददाता दिनेश वीरवाल ने पुछा की आप कंपनी के डायरेक्टर हो तो देरी कहा और किस तरह हो रही हैं बताना होगा तब तरफदार ने योजना की धीमी गति के लिए आमजनता , जनप्रतिनिधि व शासन के वे विभाग जिम्मेदार है जिन्होंने कंपनी को जमीन अलर्ट संबंधी अनुमति देरी से दी तथा एमपीआरडीसी ने तो रुपए 22 लाख जमा करने के बाद भी आज दिन तक मैसर्स इंजीनियरिंग प्रोफेशनल कंपनी को सेंशन ही प्रदान नहीं की। डायरेक्टर तन्मय तरफदार ने कोरोना कल की फर्स्ट सेकंड व थर्ड लहर को भी योजना की देरी के लिए जिम्मेदार ठहराया हैः तन्मय तरफदार के मुताबिक योजना का 70% काम तो पूरा हो गया है शेष 30% काम कुछ दिनों में पूरा कर इस पेयजल योजना को घर-घर तक पहुंचाने के भागीरथी प्रयास पूरे कर लिए जाएंगे डंपिंग व फिल्टर प्लांट संबंधी अनुमति 3 फरवरी 2020 के लगभग कंपनी को मिली तथा मोरवन बांध स्थल पर पंप हाउस के लिए जमीन पर अलॉटमेंट तो मिला पर काम करने गए तो वहां लोगों का विरोध झेलना पड़ा योजना को लेकर पिछले दिनों आयुक्त ने भी हमारी साइट का निरीक्षण किया था योजना से देरी से संबंधित और मिले नोटिस के संदर्भ में कंपनी ने उन्हें अवगत करा दिया था की योजना में देरी क्यों हो रही है इसके लिए कंपनी जिम्मेदार नहीं है।
योजना जल्दी पुरी हो इसके प्रयास जारी है-
नगर परिषद अध्यक्ष रुपेंद्र सिंह जैन ने बताया कि मुख्यमंत्री शहरी पेयजल योजना को टेडंर के अनुसार दिसंबर 2020 मे पुरा हो जाना था । निर्माण कंपनी वर्तमान में पानी की टंकी व फिल्टर प्लांट का निर्माण काम कर रही हैं। लाईनों का लगभग 70 प्रतिशत काम पुरा हो गया है। 30 प्रतिशत काम शेष है । घर घर शुद्ध पानी पहुचेगा। कंपनी के काम को लेकर न.प ने शासन को पत्र लिख अवगत करा दिया है। क्षेत्र के केबिनेट मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा स्वयं रुची लेकर योजना को शिध्र पुर्ण करने के लिए प्रयासरत हैं।
कंपनी का काम देरी से , दिसंबर में समय समाप्त हो रहा-
अर्बन डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड के मुख्य इंजीनियर दिपक रत्नावत ने बताया कि कंपनी ठीक से काम नहीं कर रही हैं यह बात सही है हमने भी कई बार नोटिस किया है। दिसंबर माह मे कंपनी का एडीवीसीबी से समय सिमा समाप्त हो रही हैं अगर कंपनी ने काम पुरा नहीं किया तो फिर अर्बन डेवलपमेंट कारपोरेशन नये सिरे से काम देखेगी।