इंदौर। ट्रैफिक को लेकर शनिवार को एक नई और सकारात्मक शुरुआत की। दैनिक भास्कर, नगर निगम, जिला प्रशासन, पुलिस और विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक व व्यापारिक संगठनों ने तय किया कि अब ट्रैफिक में भी इंदौर को नंबर-1 बनाएंगे। इसी के साथ रवीन्द्र नाट्यगृह में शुुरुआत हुई इंदौर में ट्रैफिक पर अब तक के सबसे बड़े अभियान की।
पुलिस कमिश्नर मकरंद देउस्कर ने कहा कि ट्रैफिक व्यवस्था को इतना दृढ़ बनाना होगा कि पुलिस की जरूरत ही नहीं रहे। कलेक्टर इलैयाराजा टी. ने कहा, ऐसे प्रयास करेंगे कि शहर की सड़कों पर रिजल्ट दिखाई दों। निगम कमिश्नर हर्षिका सिंह ने कहा कि मिशन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाएंगे।
दैनिक भास्कर समूह के डायरेक्टर गिरीश अग्रवाल ने शहर को ट्रैफिक में भी नंबर वन बनाने का संकल्प दिलाते हुए सांसद शंकर लालवानी, जलसंसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, कलेक्टर डॉ इलैयाराजा टी, पुलिस कमिश्नर देउस्कर और निगम कमिश्नर को ट्रैफिक सुधार की जिम्मेदारी की जैकेट पहनाई। अभियान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए अग्रवाल ने कहा कि 70 साल जीने वाला एक व्यक्ति जीवन के 3 साल ट्रैफिक जाम में गुजार देता है। सड़कों पर फंसे रहने के कारण हर साल 150 करोड़ रुपए का ईंधन यूं ही बर्बाद हो जाता है।
कार्यक्रम में सभी अतिथियों के साथ सामाजिक, धार्मिक व व्यापारिक संगठनों और संस्थाओं से जुड़ी प्रमुख हस्तियों ने ट्रैफिक रूलबुक का अनावरण भी किया। इस रूलबुक को शहर में बांटा जाएगा।
मंत्री तुलसीराम सिलावट ने कहा कि यह संकल्प इंदौर की 40 लाख जनता के साथ ही राज्य सरकार का भी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार अिभयान में पूरी मदद करेगी। उन्होंने सुझाव दिया कि अभियान को तेजी देने के लिए स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम करवाए जाएंगे। मुख्यमंत्री के साथ बैठक कर इसे अगले चरण में कैसे ले जाया जा सकता है इस पर भी विचार करेंगे।
सांसद शंकर लालवानी ने इंदौर में ट्रैफिक को सुगम करने के लिए बनाए जा रहे फ्लायओवर और ब्रिज के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि जो बदलाव हम शहर में देखना चाहते हैं वे सामूहिक प्रयास से ही संभव हैं। स्कूल के पाठ्यक्रम में भी ट्रैफिक का विषय शामिल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ट्रैफिक सुधारने के लिए शहर में शॉर्ट, मीडियम और लॉन्ग टर्म प्लान पर विचार करना होगा।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि इस अभियान की शुरुआत सकारात्मक विचार के साथ होनी चाहिए। शहर की ताकत यहां की सर्वश्रेष्ठ जनभागीदारी है। हम उसी की सहायता से ट्रैफिक की समस्या को हल करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने ट्रैफिक सुधार के लिए नो हॉन्किंग डे (हॉर्न नहीं बजाने का दिन), नो कार डे जैसे अिभयान शुरू करने और वन वे जैसी परम्पराओं को बढ़ावा देने की बात कही।