धार। उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास ने जिले के किसान भाईयों से अपील है कि वर्षा की खेच अधिक होने से खरीफ सीजन की सोयाबीन एवं अन्य फसलें मुरझा रही है। वर्तमान में सोयाबीन में जल्दी अवधि वाली किस्मों में फुल का समय निकल चुका है और मध्यम अवधि वाली किस्म या अधिक अवधि वाली किस्म में कही कही जगह पर फुल वाली स्थिति चल रही है। यह जो स्थिति है फुल आने व दाना बनने की स्थिति उत्पादन की दृष्टि से बहुत ही संवेदनशील होती है। इस स्थिति पर नमी की कमी या अल्प वर्षा की स्थिति नहीं होना चाहिए। अल्प वर्षा की स्थिति से निपटने के लिए इस प्रकार के उपाय करना चाहिए-। इनमें कृषक भाईयों के पास उपलब्ध संसाधनों से सिंचाई करना और सिंचाई की जहा तक बात है खेत में दरारें पडने से पहले सिंचाई कर दें। अल्प वर्षा की स्थिति अधिक दिनों की नहीं हुई हो तो फ्लड सिंचाई भी कर सकते है। एक पंक्ति छोडकर सिंचाई करना चाहिये, इसके साथ ही स्प्रींकलर, रेनगन से सिंचाई भी कर सकतें है। स्प्रींकलर सिंचाई प्राकृतिक वर्षा की तरह होती हैं, जो कि अधिक लाभदायक होती है। जिन किसानों के पास स्प्रींकलर उपलब्ध है वह स्प्रींकलर के माध्यम से फसलों में सिंचाई करें। फ्लड सिंचाई में इस बात का ध्यान अधिक रखे की दरारे ज्यादा बडी होने पर फसलों को झटका लगता है और पीली पडने का खतरा रहता है। फसल कुछ दिनों के लिये पीली पडती है मगर घबराने की कोई बात नहीं है सोयाबीन फसल वापस कुछ दिनों बाद अपनी अच्छी स्थिति में आ जाती है। उन्होंने जिले के कृषक भाईयों से अपील की है कि सूखे से अपनी फसल को बचानें के लिए यह जो स्थिति है उसमें स्प्रींकलर या खूली सिंचाई पद्धति से सिंचाई जरूर करें। अतः किसान बारिश का इन्तजार नही करें और अपने खेतों में सिचाई जरूर करें।